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26 Jul 2019

कारगिल विजय दिवस पर दिल्ली सरकार ने किया विजेता शूरवीरों का अपमान : मनोज तिवारी

नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों की सुरक्षा में लगे कारगिल युद्ध के विजेताओं को नौकरी से निकालने का आदेश जारी कर न सिर्फ विजेताओं की वीरता का अपमान किया है बल्कि दिल्ली के अस्पतालों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस अपमान के बारे में वह अरविंद केजरीवाल से बात करेंगे और भूतपूर्व सैनिकों को पुनः उनकी नौकरियों पर तैनात करने की माग करेंगे। कर्नल (सेवानिवृत्त) राजेश के नेतृत्व में कारगिल युद्ध में लड़ने वाले जवानों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी से मिलकर दिल्ली सरकार द्वारा अपने ऊपर हो रहे अत्याचार की व्यथा सुनाई। मनोज तिवारी ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में अस्पतालों की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं और डॉक्टरों पर निरंतर हो रहे हमलों के बाद अस्पतालों की सुरक्षा को और मजबूत करने पर विचार हो रहा है। पूर्व सैनिकों को अस्पतालों में तैनात करने की बात चल रही है, इस फैसले से यह जाहिर होता है कि दिल्ली की सरकार अस्पतालों और डॉक्टरों की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है जो प्रशिक्षित और परिपक्व सुरक्षा व्यवस्था को हटाकर अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है।
मनोज तिवारी ने कहा मैं हैरान हूँ कि इस जब पूरा देश कारगिल विजय दिवस पर सेना के उन शूरवीरों पर गर्व महसूस कर रहा है जिन्होंने अपने पराक्रम से न सिर्फ पाकिस्तान को मुँह तोड़ जवाब दिया बल्कि दुश्मन देश के द्वारा कब्जायी गई जमीन को अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देकर खाली कराया ऐसे विजेताओं को केजरीवाल सरकार ने चैकीदारी के काबिल भी नहीं समझा यह पूर्व सैनिकों का अपमान और सेना के मनोबल तोड़ने की एक ओछी हरकत है। एक ओर केजरीवाल सत्ता के स्वार्थ के लिए सरकारी खजाने को लौटाने को तैयार हैं दूसरी ओर दिल्ली की अस्पताल सुरक्षा को दाँव पर लगाने के लिए ऐसी हरकत कर रहे हैं और ऐसे समय में जब दिल्ली के अस्पतालों द्वारा यह माँग की जा रही है  कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अस्पतालों में पूर्व सैनिकों की तैनाती हो।
गौरतलब है बड़ी संख्या में ऐसे पूर्व सैनिक आठ श्री मनोज तिवारी से मिले और अपना दर्द बयां किया। दर्द बयां करते करते कारगिल जंग में शामिल कई पूर्व सैनिकों की आंखें नम हो गयी उन्होने बताया कि जब हम लोगो ने अपनी माँगो को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने का प्रयास किया तो फरियाद सुनना तो दूर उन्होंने हम से मिलना भी मुनासिब नहीं समझा। पूर्व सैनिकों ने कहा कि हम लोगों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सरहदों पर देश की रक्षा के लिए लगाया और हम में से कई लोगों की वीरता को भारत सरकार के कई पुरस्कारों के माध्यम से मान्यता भी दी गई, लेकिन हमारे हृदय को तब आघात लगा जब ऐसे बीर पूर्व सैनिकों को केजरीवाल ने चैकीदार के लायक भी नहीं समझा।

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