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29 Jul 2019

सरकार के खिलाफ बयान पर सस्पेंड बहाल होंगे डीजीपी जैकब थॉमस

कोच्चि। केरल में सीपीएम के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को सोमवार को उस समय झटका लगा जब केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने डीजीपी जैकब थॉमस को बहाल करने का आदेश दे दिया। थॉमस को 2017 में ओखी चक्रवात से उत्पन्न स्थिति से निपटने को लेकर सरकार के खिलाफ उनके बयान पर निलंबित कर दिया गया था। कैट की एर्नाकुलम पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘यह स्थापित कानून है कि निलंबन सजा का रूप नहीं ले सकता।’ पीठ ने कहा, ‘हम निर्देश देते हैं कि आवेदनकर्ता को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए और समकक्ष रैंक का एक उपयुक्त पद प्रदान किया जाए।’ पीठ ने कहा, ‘उद्देश्य स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी जांच को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं हो जब वह अपनी ड्यूटी संभाले। हालांकि सेवा से एक उचित निलंबन और प्रताड़ित करने के उद्देश्य से किए गए निलंबन के बीच वास्तव में बहुत ही पतली रेखा है।’
थॉमस को 19 दिसम्बर 2017 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ ओखी चक्रवात से निपटने को लेकर उनकी टिप्पणी पर निलंबित कर दिया गया था। इसे ध्यान में रखते हुए कि थॉमस 19 दिसम्बर 2017 से सेवा से बाहर हैं और उनके सेवानिवृत्त होने में लगभग एक वर्ष का समय बचा है, कैट ने कहा, ‘इस मामले की परिस्थितियों ने हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचाया कि राज्य सरकार का इरादा अगर केवल उनके खिलाफ लगे आरोपों के बारे में सच पता करना है तो निलंबन अवधि को जारी रखना जरूरी नहीं है।’ अधिकरण ने राज्य सरकार की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि अधिकारी को अगर सेवा में बहाल किया गया तो वह जांच को प्रभावित करेंगे। उसने कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही वित्त विभाग के पास हैं। 
अधिकरण ने कहा, ‘इसलिए अगर अधिकारी को बहाल किया जाता है तो अधिकारी द्वारा जांच को प्रभावित करने की संभावना कम दिखती है।’ अधिकरण ने कहा, ‘अगर अधिकारी पुलिस बल या उससे जुड़ी इकाइयों में काम करने के लिए फिट नहीं पाए जाते हैं तो सरकार उन्हें समकक्ष रैंक पर किसी अन्य पद पर समायोजित करे।’ थॉमस ने फैसले पर कहा कि मामले में न्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे अधिकारियों के लिए एक संदेश है। उन्होंने कहा, ‘अगर वे भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर सामने आएंगे, उन्हें न्याय निश्चित रूप से मिलेगा।’ यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार का उनके खिलाफ रुख सेवा में आने के लिए उनकी उम्मीद को कम करेगा, थॉमस ने एक समाचार चैनल से कहा, ‘केरल भारत का हिस्सा है। भारत में एक मजबूत प्रशासक है। इसलिए निर्णय होगा।’ 
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की उनकी अर्जी पर कोई निर्णय नहीं किया है। थॉमस उच्च स्तर से अनुमति लिए बिना अपनी जीवनी ‘सर्वुकालकोप्पम नीनथुंबोल’ लिखने के लिए भी एक मामले का सामना कर रहे हैं। शिकायत मुख्य सचिव टॉम जोस के निर्देश पर सामान्य प्रशासनिक विभाग द्वारा दर्ज की गई थी। पुलिस की अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है। 

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