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11 Jul 2019

दारोगा नहीं दाग तो वर्दी पर है

अलीगढ़। माल-ए-मिठाई और बिल में गालियां। यह यूपी पुलिस की ही रवायत हो सकती है। हाथरस में हसायन के एक दारोगा ने यूपी पुलिस से आए 'नमूने' पर फिर मुहर लगाई है। फिर बताया है कि योगी सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी बहुत कुछ बदला नहीं है। इसीलिए दारोगा ने व्यापारी की मुफ्त में मिठाई उड़ाई। बिल मांगा तो खुलेआम गालियों से अदा किया। भाषा ऐसी कि सुनकर सिर स्वयं झुक जाता हैै। परंतु मिठाई वाला तो 'बेचारा' था, वह आवाज उठाता भी तो कहां। इसलिए पहले भी चुप था और अब भी। शिकायत के लिए पुलिस अफसरों तक जाने में पैर कांपते हैैं, लगता है कि कोई नया बवाल-ए-जान न हो जाए।
परंतु अब पुलिस अफसरों की  कार्रवाई की भी सुनिए। एक जांच कराई, प्रारंभिक रिपोर्ट में दोषी मिला, तो सजा में दारोगा सिर्फ लाइन हाजिर। आखिर क्यों? क्या खाकी को अपने विभाग की ऐसी छवि मंजूर है? आखिर क्यों एक मिठाई वाले को गालियों की परिधि में रखा गया। क्यों देवी उपासना वाले देश में देवियों को बेइज्जत करने के रूप में नहीं लिया। क्यों अफसरों ने नहीं माना कि यह एक व्यापारी को नहीं उस समाज को गालियां हैैं, जो कारोबार की गति बढ़ाना चाहता है। क्यों नहीं सोचा कि जब तक पुलिस में ऐसी 'ब्लैक शीप' रहेंगी, खाकी वर्दी पर दाग लगते ही रहेंगे। आखिर इनको ऐसी कड़ी सजा क्यों नहीं दी जाए, कि दोबारा किसी की जुबान पर ऐसे शब्द आएं तो जीभ खुद-ब-खुद पीछे लौटे।
वैसे कभी समृद्धि के रस में डूबे रहे हाथरस का तो यह पीड़ा ही रही है।  वहां कारोबारियों को काम का माहौल नहीं मिलता। एक उद्योगपति ने अपना दर्द सुनाया कि वह अपनी फैक्ट्री का विस्तार करना चाहते थे। परंतु परिस्थितियां ऐसी कर दी गईं कि हाथरस की योजना ही त्यागनी पड़ी। वह तो पहले के कारोबार को भी यहां से हटाने की सोचने लगे लेकिन फिर रुक जाते। वजह थी कि डेढ़ सौ लोग बेरोजगार हो जाएंगे। आखिर कौन था वह जो उन्हें परेशान करता था? यह सवाल आते ही चुप हो गए। बोले कि छोडिय़े मैैं बता नहीं सकता। वहां की राजनीति ही ऐसी है कि अब कारोबार और नहीं फैला सकता। बाद में उन्होंने दूसरे जिले में अपनी फैक्ट्री लगा ली। एक यही कारोबारी क्यों? दूसरों का भी हाल ऐसा है। यह तब है जब  हाथरस में अपार संभावनाएं हैैं। ऐसे उद्योगपति मौजूद हैैं, जो निवेश को गति दे सकते हैैं। एक्सप्रेस वे, हाईवे और रेलवे का पूरा नेटवर्क है लेकिन पहले तो चौथ का कारोबार चैन नहीं लेने देता। बाद में पुलिस की गालियां हैैं। काका हाथरसी के शहर को इनसे बचाइए। बात यह बी एक दारोगा की नहीं, वर्दी पर दाग की है।
यही वर्दी सिपाही की है तो, पुलिस महानिदेशक की भी। जब यह वीडियो वायरल हो रहा है तो यही शब्द निकलते हैैं कि यूपी पुलिस में ऐसे ही हैैं। यह शब्द उन अच्छे पुलिसकर्मियों का भी मनोबल तोड़ते हैैं, जो ईमानदारी से कर्तव्य का फर्ज अदा करते हैैं। यदि एक को सबक मिलेगा तो उम्मीद जागेगी। आखिर यही तो किसी ने कहा है कि-

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