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26 Jul 2019

कांवड़ मेले में शिव व राष्ट्रभक्ति का संगम

गाजियाबाद। भगवान शिव की भक्ति में हरिद्वार से आने वाली कांवड़ का रंग परिवर्तन के दौर में बदलता जा रहा है। भक्ति और श्रद्धा समर्पण के साथ शुरू होने वाली कांवड़ मन्नतों के दौरे से भी अब आगे निकल रही है। देश के सामने विकराल रूप धारण कर चुकी पर्यावरण और नदी बचाने तक पहुंच गई हैं,अब कोई शिवभक्त शहीदों के बलिदान व देशप्रेम को लेकर तिरंगा यात्रा लिए आ रहा है तो कोई सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा पेड़ एवं नदी बचाने के लिए कर रहा है। समय के साथ-साथ कांवड़ यात्रा में भक्ति के साथ राष्ट्रप्रेम,पर्यावरण एवं जल के साथ सामाजिक सरोकारों का रंग चढ़ता जा रहा है। हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर बढ़ रहे हाईवे-58व कांवड़ पटरी व पाइपलाईन मार्ग पर कांवड़ियों का सैलाब दिन-रात पैदल चलकर आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस कांवड़ यात्रा में भक्ति के साथ कई और रंग भी हैं। पहले कांवड़ सिर्फ शिव भक्ति में लाई जाती थी। श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते हुए कांवड़ लाते थे। जलाभिषेक अपने अपने क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों में हुआ करते थे। श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर कांवड़ लाने का संकल्प लेता था। जैसे ही मनोकामना पूरी होती तो श्रद्धालु कांवड़ लाकर जलाभिषेक करते थे। आज भी अधिकांश श्रद्धालु इसी तरह कांवड़ लाते हैं।
हालांकि कावड़ लाने का तरीका सबका अलग अलग है। पिछले एक दशक में श्रद्धालु अपने-अपने गांव के मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भी कांवड़ लाने लगे। पहले श्रद्धालु केवल पैदल ही कांवड़ लाया करते थ,े लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें भी बदलाव आया है। नौकरी पेशा अथवा पैदल चलने में असमर्थ श्रद्धालु अब अपने वाहनों से एक दिन पहले हरिद्वार पहुंचकर कांवड़ ला रहे हैं। इसमें 15-20 श्रद्धालुओं की टोलियां द्वारा डाँक कांवड़ का चलन तेजी से बढ़ा है। डीजे की धुन पर नाचते थिरकते श्रद्धालु शिव का अभिषेक करने को कांवड़ ला रहे हैं। स्कूटर,मोटरसाइकिल, कार से भी कांवड़ लाने वाले की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
कुंभ की तर्ज पर की गई कांवड़ यात्रा की व्यवस्था
भक्ति के इस सैलाब को प्रमोट करने के लिए सरकार भी पीछे नहीं है, कांवड़ियों की हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और रास्ते में तमाम तरह की सुविधाएं इसी मुहिम का हिस्सा है। सरकार कांवड़ यात्रा को कुंभ की तरह प्रमोट कर रही है, हालांकि करोड़ों श्रद्धालुओं के बावजूद कांवड़ यात्रा के प्रबंधन के लिए कोई प्राधिकरण नहीं है जैसा बजट कुंभ के लिए रखा जाता है, वैसा अभी कांवड़ यात्रा के लिए नहीं है।
वन-वे से वाहनों का बढ़ा दबाव, जाम से हांफने लगा मेरठ मार्ग
कांवड़ यात्रा के लिए हाईवे-58 पर की गई बेरिकेडिंग व चौराहों को बंद किए जाने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरामरा गयी है। रूट डायवर्जन किए जाने के बाद हाईवे-58 को वन-वे किये जाने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। राजनगर एक्सटेंशन से लेकर मुरादनगर, मोदीनगर व शहर के ज्यादातर मार्गो पर लोगों को भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है। लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गये हैं।
वन वे मार्ग होने पर वाहनों की हुई भरमार के कारण यातायात व्यवस्था पहलें दिन ही गुरुवार को ढर्रें से उतर गयी। शुक्रवार को भी जाम के झाम में फंसकर लोगों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। पुलिस-प्रशासन, यातायात विभाग की ओर से हाईवे-58 पर ज्यादातर कट बंद कर दिये गये हैं, सिर्फ उन्हीं का रास्ता छोड़ा है,जहां वाहनों का जबरदस्त दबाव है। हाईवे-58 पर कम से कम तीन चार किलोमीटर पर एक कट खुला है। ऐसे में वाहनों का सारा दबाव चौराहों पर आकर सिमट गया। लोगों का कहना है कि दिल्ली की तर्ज पर यदि टैÑफिक सिंग्नल सिस्टम इस मार्ग पर होते ओर अतिक्रमण पर प्रशासन का चाबुक ठीक तरीके से चलता व आॅटो के लिए स्थाई स्टैंड होते तो जाम की यह परेशानी न झेलनी पड़ती। सिग्नल खराब होने व यातायात की इस व्यवस्था के धराशायी होने के कारण ही हाईवे-58 मार्ग पर सार्वजनिक स्थलों, चौराहों पर ही जाम का सामना क रना पड़ रहा है।
वन-वे पर जाम के कारण 10 मिनट के सफर में लोगों को तीन घंटे लग गए। गुरुवार को दिन से लेकर रात तक वाहन रेंग रेंगकर चलते दिखाई दिए। यही हाल शुक्रवार की सुबह से सड़क पर दिखा। राजनगर एक्सटेंशन से लेकर गुलधर, दुहाई, मुरादनगर बस स्टैंड, आर्डिनेंस फैक्ट्री से मोदीनगर के राजचौराहे से लेकर मोदी मंदिर तक दूसरें दिन भी जाम ने और विकराल रूप ले लिया। गर्मी में जाम से लोगों के पसीने छूट गए। वाहन चालकों ने छोटे रास्तों व संपर्क मार्गों का सहारा लिया तो वहां भी जाम की स्थिति बन गई। शिवभक्तों की आवाजाही को देख ट्रैफिक वन-वे होने से भीषण जाम लगा रहा।

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