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17 Jul 2019

बाढ़ में फंसे परिवारों को मजबूरन खाने पड़ रहे हैं चूहे

बिहार। कुछ वक्त पहले देश पानी की किल्लत से जूझ रहा था लेकिन मानसून आते ही पहले मुंबई फिर बिहार, असम समेत देश के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। बिहार की ही अगर हम बात करें तो आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार के 12 जिलों शिवहर, सीतामढी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया एवं कटिहार में अब तक 33 लोगों की मौत होने के साथ 26 लाख 79 हजार 936 लोग प्रभावित हुए हैं। बिहार में बाढ़ के कारण मरने वाले लोगों में सीतामढी के 11, अररिया के 9, शिवहर के 7, किशनगंज के 4 और सुपौल 2 लोग शामिल हैं।  बाढ़ से जूझते हुए प्रदेश में लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकार के दावे कितने सही हैं यह तो ग्राउंड जीरो की हकीकत देखने के बाद आप सभी को खुद-ब-खुद समझ में आ जाएगी।
बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन को बताया कि बाढ़ की आपदा से पीडि़त लोगों को तत्परता के साथ हमने हर संभव सहायता मुहैया कराने का प्रयास किया और आगे भी कर रहे हैं। सभी जिलाधिकारियों को पूरी मुस्तैदी से राहत एवं बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नीतीश कुमार ने यह तो कह दिया कि हम पीड़ितों को सहायता के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रहे हैं लेकिन क्या मुख्यमंत्री साहब बिहार की इस हकीकत से अंजान हैं। उत्तर बिहार में एक परिवार जिंदा रहने के लिए चूहे मारकर खाने के लिए मजबूर हो गया है। कटिहार जिले के कदवा प्रखंड स्थित दांगी टोला इलाके में एक परिवार बाढ़ से बचने के लिए दर-बदर भटक रहा है और जीवनयापन करने के लिए चूहे मारकर खा रहा है।

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