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18 Jun 2019

जिला एमएमजी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते गंभीर रूप से बीमार सवा महीने के बच्चे की हुई मौत

गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के चलते गंभीर रूप से बीमार सवा महीने के बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल में एक रुपये की पर्ची के बिना इलाज नहीं किया गया, जिसकी वजह से बच्चा नहीं रहा। पीड़ितों ने बताया कि बच्चे का पिता एक रुपये की पर्ची बनवाने के लिए 2 घंटे तक दौड़ता पड़ा। डॉक्टरों ने बिना पर्ची बनवाए उसका इलाज करने से इनकार कर दिया। इस दौरान इलाज न मिलने से बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिवारवाले रोते-बिलखते रहे, लेकिन वहां से गुजर रहे चिकित्सकों ने उनकी सुध तक नहीं ली।जानकारी के अनुसार, डासना-मसूरी के बसंतगढ़ी गांव निवासी इरशाद अपने सवा महीने के बच्चे को शरीर नीला पड़ने के कारण इलाज के लिए जिला एमएमजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण वह बच्चे को लेकर इमर्जेंसी में पहुंचे, लेकिन वहां तैनात चिकित्सक ने बच्चे को बिना देखे ही अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में जाने के लिए बोल दिया।
बच्चे को गोद में लेकर जब इरशाद बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में पहुंचे तो वहां पर निजी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण इलाज के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी। उन्होंने बच्चे की हालत गंभीर होने का हवाला देकर ओपीडी में जाने की कोशिश की तो अन्य मरीजों ने उन्हें रोक दिया।आधे घंटे बाद जब उनका नंबर आया तो चिकित्सक ने उन्हें पहले एक रुपये की पर्ची बनवाकर लाने के लिए कह दिया। पर्ची बनवाने के लिए भी मरीजों की लंबी लाइन लगी हुई थी। किसी तरह आधे घंटे बाद जब वह पर्ची बनवाकर लौटे तो चिकित्सक ने बच्चे की हालत गंभीर होने का हवाला देते हुए उसे दोबारा इमर्जेंसी में ही दिखाने के लिए भेज दिया। दोबारा जब वह इमर्जेंसी पहुंचे तो चिकित्सक ने उन्हें बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताते हुए किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया, लेकिन लिखित में रेफर नहीं किया।ऐसे में दंपती खुद ही अपने सवा महीने के बच्चे को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। जहां बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में जाने से पहले उसे एक बार फिर पर्ची बनवाने के लिए बोल दिया गया। पिता के पर्ची बनवाकर लौटने तक बच्चे ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। गोद में बच्चे के दम तोड़ते के बाद मां रुकसाना अस्पताल में ही बेहोश हो गईं।32 वर्षीय इरशाद ने बताया कि उनके सवा महीने के बच्चे का शरीर सोमवार सुबह 6 बजे अचानक नीला पड़ गया था। यह देखकर पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन धीरे-धीरे उसकी आंखें और नाखून तक नीले पड़ गए। इसके बाद वह जाम से जूझते हुए करीब 10 बजे एमएमजी अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही के कारण 2 घंटे यानी 12 बजे तक इलाज नहीं मिला। इसके कारण बच्चे ने दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता का कहना है कि वह मजदूर वर्ग हैं, इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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