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4 Jun 2019

फिर निपाह के डर से केरल में सहमे लोग

संवाद इंडिया डेस्क। केरल में इन दिनों एक बार फिर वायरस निपाह (Nipah) अपने पैर पसार रहा है। हाल ही में केरल की स्वास्थ्य राज्य मंत्री केके शैलजा ने केरल में निपाह वायरस के पहले मामले की जानकारी दी है। एक 23 साल के युवक को निपाह वायरस से संक्रमित होने संदेह में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसकी पुष्टि पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) कि रिपोर्ट में हुई है। केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने भी राज्य के लोगों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। पिछले दो हफ़्ते में केरल के तटीय शहर कोझिकोड में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की वजह यही वायरस बताया गया था। तब राज्य मंत्री ने कहा था कि मृतक की बीमारी के पीछे कौन सा वायरस है, यह अब भी रहस्य है। हालांकि, मृतक के ख़ून और दूसरे सैम्पल पुणे में नेशनल वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट को भेजे गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक निपाह वायरस (NiV) तेजी से फैलता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारी को पैदा करता है। इसका सबसे पहला मामला 1998 में मलेशिया के एक गांव 'सांगुई निपाह' में इस वायरस का पता चला थआ। और तभी से इसका नाम निपाह वायरस पड़ा।इस बीमारी के चपेट में आने की पहली घटना तब हुई जब मलेशिया के खेतों में सूअर, फ्रूट बैट (चमगादड़ की एक प्रजाति) के संपर्क में आए। उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे। लेकिन इसके बाद जहां-जहां NiV के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे। साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इसकी चपेट में आए। दरअसल, इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और पेड़ तक इस वायरस को ले जाने वाली चमगादड़ थी। जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है। केंद्रीय मेडिकल टीम ने विभिन्‍न जगहों से कुल 21 नमूने एकत्रित किए थे जिसमें से सात चमगादड़, दो सूअर, एक गोवंश और एक बकरी या भेड़ से था। इन नमूनों को भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया था। अधिकारी ने कहा, इन नमूनों में उन चमगादड़ों के नमूने भी शामिल थे जो कि केरल में पेराम्बरा के उस घर के कुएं में मिले थे जहां शुरूआती मौत की सूचना मिली थी। इन नमूनों में निपाह विषाणु नहीं पाए गए हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में मृत मिले चमगादड़ों के नमूने पुणे भेजे गए थे, उनमें भी यह विषाणु नहीं मिला है। इसके साथ ही हैदराबाद के संदिग्ध मामलों के दो नमूनों में भी यह विषाणु नहीं मिले हैं।निपाह वायरस से संक्रमित व्यक्ति को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, उनींदापन, मानसिक भ्रम, कोमा, विचलन होता है। निपाह वायरस से प्रभावित लोगों को सांस लेने की दिक्कत होती है और साथ में जलन महसूस होती है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत भी सकती है। इंसानों में निपाह वायरस एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से ब्रेन में सूजन आ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मामलों में 24-28 घंटे के अंदर लक्षण बढ़ने पर मरीज कोमा में भी चला जाता है। इंसानों में NiV इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है। इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं बना है।भारत में निपाह वायरस का हमला पहली बार नहीं है। देश में निपाह वायरस का का पहला मामला वर्ष 2001 के जनवरी और फरवरी माह में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में दर्ज किया गया है। इस दौरान 66 लोग निपाह वायरस से संक्रमित हुए थे। इनमें से उचित इलाज न मिलने की वजह से 45 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, निपाह वायरस का दूसरा हमला वर्ष 2007 में पश्चिम बंगाल के नदिया में दर्ज किया गया। उस वक्त पांच मामले दर्ज किए गए थे, इसमें से पांचों की मौत हो गई थी।
बरते यह सावधानी
- स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर के अनुसार चमगादड़ों की लार या पेशाब के संपर्क में न आने से बचें।
- ऐसी जगहों पर भी न जाएं जहां पर चमगादड़ों का आना जाना लगा रहता होखासकर पेड़ से गिरे फलों को खाने से बचें।
- फलों को पानी में धोकर खाएं।
- संक्रमित सुअर और इंसानों के संपर्क में न आएं।
- जिन इलाकों में निपाह वायरस फैल गया है वहां न जाएं।
- व्यक्ति और पशुओं के पीने के पानी की टंकियों सहित बर्तनों को ढककर
- बाजार में कटे और खुले फल न खाएं।
- संक्रमित पशु के संपर्क में न आएं। खासकर सुअर के संपर्क में आने से बचें।
- निपाह वायरस के लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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