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5 Apr 2019

मिट्टी धसकने से 48 घंटे बाद भी नहीं निकाल पाए बोरवेल में फंसी बच्ची

फर्रुखाबाद। कमालगंज थाना क्षेत्र के रशीदापुर गांव में  गहरे बोरवेल में फंसी आठ वर्षीय बच्ची को 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका। करीब 32 फीट की गहराई पर फंसी बच्ची तक पहुंचने के लिए बनाई गई रैंप के किनारो की बलुई मिट्टी बार बार धसक रही है। यही कारण है कि सीमा को निकाला नहीं जा सका। गुरुवार देर रात से पोकलैण्ड व जेसीबी मशीन से खोदाई की जा रही है। शुक्रवार को कवायद जारी है। बचाव दल ने बच्ची को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन असीम नाम दिया है। कमालगंज के गांव रशीदापुर में बुधवार दोपहर तकरीबन 2:30 बजे आठ वर्षीय सीमा बोरवेल में गिर गई थी। 26 फीट गहराई पर फंसी बालिका को निकालने के लिए स्थानीय जवान देर रात दो बजे तक जुटे रहे। ऑपरेशन 'असीम' के तहत जेसीबी से रैंप बनाकर सुरंग से बालिका तक पहुंचने का प्रयास किया।
हालांकि कुछ ही दूरी रह जाने पर बलुई मिट्टी धंस गई और बचाव कार्य रुक गया। इसके बाद आगरा से पैरामिलिट्री कंपनी बुलाई गई। लेफ्टिनेंट कर्नल जय मस्के व कैप्टन निरुपम कक्कड़ मौके पर पहुंचे और दूसरी जगह से रैंप बनाई। सुबह दस बजे 27 फीट की गहराई पर पहुंचकर जब बच्ची तक जाने के लिए सुरंग बनानी शुरू की तो एक बार फिर बलुई मिट्टी धंसगई। इससे सीमा 5 से 6 फीट नीचे ओर खिसक गई। तीन जवान भी घायल हो गए। गंभीर हालत में एक जवान को मिलिट्री हास्पिटल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर लखनऊ से आई राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) की बारह सदस्यीय टीम ने बचाव कार्य शुरू किया। देर रात तक टीम बच्ची तक पहुंचने के प्रयास में जुटी रही। 
सीमा ने मांगा पानी लेकिन पी न सकी
बोरवेल के अंदर जिंदगी और मौत से जूझ रही आठ वर्षीय बच्ची सीमा ने गुरुवार दोपहर पानी मांगा। दूध की बोतल से उसके पास पानी भेजा गया, हालांकि वह उसके पास तक पहुंच न सका। ऑपरेशन 'असीमÓ में जुटे सेना के जवान सीमा की हालत पर पल-पल नजर रख रहे हैं। गुरुवार दोपहर जवानों ने उसे आवाज दी। इस पर सीमा ने प्यास लगने की बात कही और पानी मांगा। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने दूध की बोतल मंगाई। इसी में पानी भरकर जवानों ने टेप से बांधकर रस्सी के सहारे बोरवेल में पहुंचाया, लेकिन बोतल सीमा के पास तक नहीं पहुंच सकी। 
रातभर बैठी रही विक्षिप्त मां
सीमा के पिता नरेश चंद्र की कई साल पहले मौत हो चुकी है। मां उर्मिला विक्षिप्त हैं। वहीं भाई आदेश दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। बुधवार दोपहर से लगातार उर्मिला बोरवेल के पास ही बैठी हैं। रात में भी वह वहां से हिली नहीं। सेना के जवान थोड़ी-थोड़ी देर में उसकी सीमा से बात कराते हैं ताकि मां-बेटी का हौसला बने रहे। 
मुस्लिम युवकों ने बंटाया सेना का हाथ 
आगरा से आई पैरा मिलेट्री की 42 सदस्यीय टीम ने बोङ्क्षरग से कुछ दूरी पर खोदाई कराई। इस दौरान आवश्यकता पडऩे पर जरारी गांव के 30 मुस्लिम युवक आगे आए और सेना का हाथ बंटाया। 

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