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14 Nov 2018

मोदी, पेन्स के बीच रक्षा, व्यापार एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के मुद्दों पर चर्चा : अंतर्राष्ट्रीय

सिंगापुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेन्स ने बुधवार को यहां रक्षा एवं व्यापारिक सहयोग, आतंकवाद से निपटने के तरीकों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त एवं खुला बनाए रखने की जरूरत सहित द्विपक्षीय एवं वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मोदी आसियान और पूर्व एशियायी देशों के साथ विभिन्न बैठकों में भाग लेने यहां आए हुए है। इस दौरान प्रधान मंत्री की विश्व के कई नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें भी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ मोदी की बैठक के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि दोनों नेताओं ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान अलग से गर्मजोशी के साथ मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनके बीच, “क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भारत और अमेरिका के हितों में बढ़ते सामंजस्य के आधार पर वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के सभी पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई।विदेश सचिव विजय गोखले ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि पेंस ने 26 नवंबर 2008 में मुंबई हुए घातक आतंकवादी हमले की इसी माह पड़ रही 10वीं बरसी का उल्लेख किया और आतंकवाद से निपटने को लेकर दोनों देशों के सहयोग की प्रशंसा की। मोदी ने पेन्स का धन्यवाद किया और बिना किसी संस्थान या देश का नाम लिए बिना उन्हें याद दिलाया कि किसी भी तरह से देखें तो वैश्विक आतंकवादी हमलों में सामने आई जानकारी से मालूम होता है कि इन सभी का स्रोत और उद्गम स्थल अंतत: एक ही है। 
पेंस ने मोदी के साथ बातचीत के बाद ट्वीटर पर कहा, ‘(हमने) मुक्त और खुले भारत-प्रशांत क्षेत्र पर अपने साझे दृष्टिकोण पर बातचीत की और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आतंकवाद निरोधक सहयोग और समन्वय को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराया। ’ पेंश के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि उन्होंने, ‘भारत और अमेरिका के बीच मुक्त और न्यायोचित द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहित किए जाने पर बल दिया।’ गोखले ने कहा कि यह मुलाकात ‘‘बहुत अच्छी रही।’गोखले ने मुंबई हमले के सरगना हाफिज सईद की पार्टी के पाकिस्तान में 25 जुलाई को हुए चुनाव लड़ने की घटना की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने मुंबई हमले में शामिल लोगों को राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए मुख्यधारा में शामिल किए जाने को भारत और अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बताया जो हाल ही में पाकिस्तान के चुनावों में देखा गया। दोनों पक्षों ने व्यापार संबंधी से जुड़े मामलों पर भी चर्चा की। 
उन्होंने कहा, “हम इसपर सहमत हुए कि अमेरिका के साथ बन रहे नए रिश्ते में जहां व्यापार का विस्तार हो रहा है, हमें उन तरीकों को तलाशने की जरूरत है जिससे इस प्रक्रिया के संभव होने में मदद मिल सके।”दोनों पक्षों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हुई और दोनों देश इसपर सहमत हुए कि उनके रक्षा संबंधों और अमेरिका से भारत में सैन्य उपकरणों के आयात में काफी वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका के लिए भारत में रक्षा उपकारणों का निर्माण करने और रक्षा उद्योग स्थापित करने के बड़े अवसर उपलब्ध हैं। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के रक्षा एवं विदेश मंत्रियों के बीच हाल में एक हुई पहली ‘‘टू प्लस टू ’’ वार्ता की भी सराहना की गई। पेंस ने कहा कि भारत ने मोदी के नेतृत्व में क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों में आर्थिक एवं कूटनीतिक रूप से पर्याप्त वृद्धि की है। पेंश ने अनुभव किया कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत सकारात्मक भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका विभिन्न मुद्दों पर भारत के साथ -राजनीतिक और आर्थिक दोनों पहलुओं में मिल कर काम करना चाहता है ताकि ‘हम एक न्यायोचित और नियमों पर चलने वाली विश्व-व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें।’’ इसके अतिरिक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी चर्चा हुई। मोदी ने पेंस को बताया कि इस क्षेत्र को लेकर उनके नजरिए को स्वीकार्यता मिल रही है और इसे आगे बढ़ाने के लिए आगामी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का इसके लिए प्रयोग करना चाहिए। 
वहीं पेंस ने माना कि स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत का योगदान अहम है। गोखले ने बताया कि पेंस ने कहा है कि दोनों पक्ष ‘‘कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने के लिए चल रहे प्रयासों” पर भी चर्चा करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने के लिए चलाए गए अभियान में अपने देश का समर्थन करने के लिए भारत को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, इस अभियान में ‘‘भारत के मजबूत समर्थन के हम आभारी हैं।’’

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