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16 Nov 2018

एसएसपी वैभव कृष्ण का तबादला हुआ : गाजियाबाद

गाजियाबाद। एसएसपी वैभव कृष्ण को आखिरकार आठ महीने के कार्यकाल के बाद हटा दिया गया। हालांकि जिस तरह से उन्हें किसी जिले में पोस्टिंग देने के बजाय प्रयाग में पीएचक्यू भेजा गया है, उसे एक सजा के रूप में देखा जा रहा है। कुछ जानकार इसे पिछले 15 दिनों में तेजी से बढ़े अपराध के कारण डीजीपी की नाराजगी के रूप में देख रहे हैं। वहीं, विभागीय अफसरों का कहना था कि वैभव को हटाने के लिए बीजेपी के कुछ नेताओं और यहां तैनात एक आईएएस अफसर ने पूरी ताकत लगा रखी थी। खुद वैभव को भी इस बात की जानकारी लग गई थी, जिसके चलते उन्होंने प्रदेश सरकार को स्वेच्छा से हटने के बारे में लिखकर दे दिया था।
ऑन द स्पॉट एफआईआर की शुरुआत की
जिले में बढ़े अपराधों और आम लोगों में पुलिस की बिगड़ती छवि के कारण मार्च महीने में तत्कालीन एसएसपी एचएन सिंह को हटाकर वैभव कृष्ण को इटावा से गाजियाबाद में एसएसपी बनाकर भेजा गया था। इसके बाद न केवल उन्होंने थानों में दलालों के प्रवेश पर रोक लगाने की थानेदारों को सख्त हिदायत दी बल्कि एफआईआर दर्ज न होने की शिकायतों को दूर करने के लिए ऑन द स्पॉट एफआईआर दर्ज करने की शुरुआत की। इसका नाम उन्होंने डायल एफआईआर दिया। इसके तहत यदि किसी के साथ कोई वारदात होती है तो पुलिस मौके पर जाकर एफआईआर दर्ज करेगी। अपनी तरह की पहली शुरुआत कर वह प्रदेश भर में चर्चाओं में आ गए थे। इसके बाद उन्होंने परी दिवस, ऑपरेशन ऑल आउट और चक्रव्यूह जैसे अभियान चलाए।
विधायकों से लेकर आईएएस तक से पंगा
वैभव कृष्ण एसएसपी रहते हुए बीजेपी के विधायकों और एक आईएएस अधिकारी से पंगा लेने के बाद प्रदेश में और चर्चित हो गए। लोनी के विधायक नंदकिशोर गुर्जर के पास मौजूद पांच गनर में से चार को वापस लेने के बाद विधायक ने कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने चार अन्य विधायकों के साथ मीटिंग कर बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से शिकायत की थी। इन विधायकों ने एसएसपी पर उनकी बात न सुनने का आरोप लगाते हुए अपनी सरकारी सुरक्षा वापस करने की घोषणा कर दी थी। बावजूद इसके वैभव ने अपना फैसला नहीं बदला था। इसका नतीजा यह हुआ कि विधायक लगातार सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने का आरोप लगाकर वैभव कृष्ण को घेरते रहे। इसी दौरान थानेदारों के ट्रांसफर के मुद्दे पर एक आईएएस अफसर से उनकी खटक गई। आईएएस अफसर से टकराने का मामला लखनऊ तक चला गया। एसएसपी ने शासन से उन्हें हटाने तक के लिए कह दिया। हालांकि दोनों अफसरों ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोला था।
जिले के एक प्रतिनिधि ने की थी कंप्लेंट
एसएसपी वैभव कृष्ण को जिस तरह से हटाया गया है उसमें जिले के एक जनप्रतिनिधि की बड़ी भूमिका बताई जा रही है। इस नेता ने हाल में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर जिले में पार्टी नेताओं की छवि खराब होने की शिकायत की थी। चूंकि पिछले कुछ दिनों से अपराध भी बढ़ गए थे इसलिए इसका आधार बनाकर वैभव को एसएसपी पद से हटा दिया गया। एक जनप्रतिनिधि ने बताया कि वैभव को हटाने के लिए एक विधायक ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मांग की थी।

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