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14 Nov 2018

भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में अतुलनीय बलिदान देने वाले नवाब मोहम्मद खाँ बंगश के परिवार के वंशजों / उत्तराधिकारियों को आर्थिक मदद देने हेतु सरकार से की मांग : फर्रुखाबाद

कुलदीप अवस्थी,(फर्रुखाबाद)। सन 1714 में बादशाह फर्रुखशियर के नाम शहर फर्रुखाबाद को बसाने वाले नवाब मोहम्मद खां बंगश के खानदान के चश्मोचिराग व फर्रुखाबाद के आखिरी नवाब तहफुज्जल हुसैन के वारिस जीवित पडपौत्र जनाब नवाब काजिम हुसैन अली के साथ राकेश सागर पूर्व सूबेदार की  मुलाकात हुई । नवाब काजिम हुसैन अली से उनके पिता, दादा और परदादा के बारे में भी जानकारी हासिल हुई। उन्हें देख कर आश्चर्य हुआ कि नवाबों का वारिस आज बेहद गरीबी, अभाव व तंगहाली से जूझ रहा है जिसके पुरखों और पीढ़ियों ने कभी इस शहर को बसाने के साथ ही यहां की जनता पर लगभग 200 साल तक हकूमत की थी तथा अंग्रेजों से लडाईंयां लड़ते हुए तमाम कुर्बानियां दीं थीं ।  उनकी पीढ़ियों ने भी न केवल गरीबी/अभाव को झेला बल्कि उनके वर्तमान जीवित चश्मोचिराग आजकल बेहद गरीबी में जीवन गुजार रहे हैं।  जिनके पुरखों ने देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से लड़ाईयां लडीं तथा बगाबत के जुर्म में उन्हें फांसी के फंदों पर लटकाया गया, उनके इतिहास पर दृष्टिपात करते हुए प्रदेश सरकार को नवाब काजिम हुसैन अली को कम से कम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वंशज के तौर पर एवं फर्रुखाबाद के प्रथम शासक/ प्रथम नागरिक के वंशज अथवा एक बेहद गरीब इंसान के तौर पर ही सही, उनकी तंगहाली को दूर करने हेतु पेंशन/वन टाइम आर्थिक मदद/ पैकेज विशेष देकर उनके पुरखों की कुर्बानियों एवं शहादतों के प्रति कृतज्ञता का इजहार कर बंगश खानदान के वारिस को सम्मानित करने का काम करना चाहिए । अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं काँग्रेसी नेता पूर्व सूबेदार राकेश सागर ने  सरकार से अपील करते हुये जिलाधिकारी से निवेदन किया है कि सरकारी योजनाओं के जरिए ही कम से कम बंगश खानदान के वारिस/चश्मोचिराग को गरीबी से मुक्त करने का इंतजाम करें । भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं शहीद परिवार संगठन के मीडिया प्रभारी व प्रदेश उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश शर्मा ने इन महापुरुषों को स्मरण करते हुये कहा कि भारत देश को ब्रिटिश हुक़ूमत से आजाद करवाने वाले स्वतन्त्रता संग्राम के शहीद एवं सेनानी परिवारों की बदहाली की स्थिति पर सरकार को सहानभूति प्रकट करते हुये उनको सम्मान एवं आर्थिक सहायता प्रदान करना सरकार का दायित्व बनता है । इन्ही महापुरुषों के त्याग और बलिदान के फलस्वरूप आज हम भारतवासी आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं ।

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