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16 Nov 2018

मौत की भविष्यवाणी करने वाले कुंजीलाल का हाल बेहाल : मध्य प्रदेश

बैतूल। 'काश उसी दिन मर गया होता... तब मेरी सांसों को सुनने के लिए भी कैमरे लगे थे। आज हर दिन तिल-तिल कर मरता हूं तो कोई पूछने वाला नहीं...।' किसी तरह टूटी आवाजों में इशारों से 86 साल के कुंजीलाल यह बताते हुए फफक पड़े। एमपी की राजधानी भोपाल से करीब 220 किलोमीटर दूर बैतूल जिले से सटे सेहरा गांव में कुंजीलाल अब न ठीक से बोल पाते हैं और न देख पाते हैं। कुंजीलाल 13 साल पहले तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने अपनी मृत्यु के दिन का ऐलान किया था और इसके बाद पूरे देश में लाइव ड्रामा चला था। इन 13 वर्षों में क्या बदला, इस सवाल का जवाब देते हुए उनके बेटे अनिरुद्ध का गला रुंध जाता है। कहते हैं, 'सब बर्बाद हो गया। उस दिन यमराज तो नहीं आए लेकिन खामोशी से विपदा जरूर आ गई।' वह बताते हैं कि किस तरह पिता का पूरे देश के सामने तमाशा बनने के बाद जैसे ही कैमरे ओझल हुए उनके बुरे दिन शुरू हो गए।पहले उस गांव में कुंजीलाल का बहुत सम्मान था। कुंजीलाल अपने पिता सहित कई लोगों की मृत्यु तिथि या दूसरी बातों का सटीक आकलन करने वाले जाने जाते थे। पर, इस घटना ने विश्वास तोड़ दिया। लोग शादी-ब्याह के लिए उनसे राय लेने से कन्नी काटने लगे। फिर वह बीमार होने लगे। साथ में उनके बेटे 60 साल के अनिरुद्ध भी बीमार होने लगे। जमीन बिकने लगी। घर में कमाई के स्रोत बंद हो गए। खेती के लिए कर्जा लिया जो बाद में बढ़ता ही गया।
मीडिया और सरकार से शिकायत 
उनके बेटे को मीडिया और सरकार दोनों से शिकायत है। वह कहते हैं कि जब उनके पिता को तमाशा बनाया जा रहा था तब सभी आए लेकिन आज उन्हें हर कोई भूल गया। उन्हें सरकार से कोई सुविधा नहीं मिलती है। आज वह कर्जों के बोझ में पूरी तरह दब चुके हैं। उनकी ख्वाहिश है कि आज अगर फिर कैमरा आता तो देखता कि 
यह पूछने पर कि तब से लेकर आज तक कोई दोबारा उनकी दशा देखने आया, अनिरुद्ध ने कहा कि उस रात जब उनके घर से कैमरों की भीड़ निकली तब से लेकर आज तक फिर कोई झांकने नहीं आया। कुंजीलाल और उनके परिवार को अफसोस भी है कि उन्होंने तब अपनी बात सार्वजनिक क्यों की थी। उन्हें लगता कि मीडिया ने उनका तमाशा बना दिया। 
लाइट-कैमरा-ऐक्शन और लाइव तमाशा 
13 साल पहले 19 अक्टूबर 2005 को कुंजीलाल ने ज्योतिषीय गणना करने के बाद ऐलान किया था कि उसी दिन 3 से 4 बजे के बीच उनकी जान चली जाएगी। मीडिया में छपी खबरों के साथ यह बात दिल्ली तक आग की तरह फैल गई। अगले कुछ दिनों में यह देश में बहस का सबसे गर्म मुद्दा बन गया था कि कुंजीलाल का क्या होगा? दिल्ली से दर्जनों कैमरे कुंजीलाल लाइव करने लगे। राज्य सरकार और स्थानीय शासन किसी अनहोनी को लेकर सतर्क हो गया। सेहरा गांव टूरिस्ट स्पॉट बन गया था। लेकिन चार बजे के बाद जब मंदिर से कुंजीलाल निकले तो उन्होंने मृत्यु पर विजय की बात कह कर मामला को खत्म किया। 
तमाशे से पीपली लाइव तक 
आमिर खान ने इसी घटना से प्रेरित होकर एक फिल्म बनाई थी 'पीपली लाइव' जो सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी। हालांकि कुंजीलाल और उनके गांववालों को यह नागवार गुजरा था। उनके तमाशे पर हुई इस कमाई में हिस्सा मांगने के लिए उन्होंने अदालत का भी रास्ता अपनाया लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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