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14 Jul 2019

इंदिरापुरम पुलिस और स्वैट टीम ने फर्जी कॉल सेन्टर का किया भंडाफोड़

राजीव अवस्थी,(गाजियाबाद)। इंदिरापुरम पुलिस और स्वैट टीम ने कॉल सेंटर के जरिए बीमा, लोन और शेयर मार्केट में निवेश करवाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में शनिवार को कॉल सेंटर के मैनेजर व गिरोह में शामिल 4 युवतियों समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। कॉल सेंटर करीब एक साल से चल रहा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 मोबाइल, 3 नोटबुक और 50 हजार रुपये भी बरामद किए हैं। एसपी सिटी श्लोक कुमार ने बताया कि कॉल सेंटर का मैनेजर विजयनगर निवासी भारत कुमार है, जबकि इस गिरोह का सरगना हरियाणा का रहने वाला आसिफ नाम का व्यक्ति है। वह गैंग से केवल फोन के जरिए संपर्क में रहता है। इस कॉल सेंटर में गौरव, संजीव, ज्योति, ममता, पूजा और भावना काम करती थी। सभी को 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता था। इन सभी को छापा मारकर गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि गिरोह दिल्ली में रहने वाले अजीत नाम के युवक व बीमा कंपनियों में काम करने वाले कुछ अन्य लोगों से 10 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से अलग-अलग पॉलिसी होल्डर का डेटा लेता है। उस डेटा में पॉलिसी नंबर, मोबाइल नंबर, फोटो और एड्रेस होता है। इसके आधार पर कॉल सेंटर से पॉलिसी होल्डर को फोन किया जाता था और उसे अच्छी स्कीम बताकर नई पॉलिसी के नाम पर ठगा जाता था। पैसे खाते में डलवाए जाते थे, इसके लिए इन लोगों ने 4 करंट अकाउंट खुलवा रखे थे। कॉल सेंटर इंदिरापुरम के क्लाउड-9 मॉल में एमएस इटेलिक सर्विस के नाम से चल रहा था। जिसका प्रॉपराइटर अभिषेक है। उन्होंने बताया कि पुलिस आसिफ, अजीत और अभिषेक की तलाश कर रही है।
स्वैट टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर संजय वर्मा ने बताया कि पहली कॉल में ये लोग उन्हीं लोगों को निशाना बनाते हैं, जिनकी पॉलिसी मैच्योर होने वाली होती है। कॉल करके ये लोग खुद को आईआरडीए का प्रतिनिधि बताते हैं। इसके बाद डेटा से बीमा पॉलिसी का नंबर, बॉन्ड व पेंशन आदि की जानकारी देते हैं। इसके बाद बताते हैं कि उनकी पॉलिसी के तहत उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। अगर इसे आईआरडीए के जरिए कैंसल कराएंगे तो पूरी रकम वापस हो जाएगी। पर इससे पहले आपको दूसरी पॉलिसी करानी पड़ेगी। पॉलिसी के नाम पर ये लोग चेक मंगा लेते हैं और फिर एक फर्जी पॉलिसी नंबर मेसेज व ईमेल करते हैं। यहां से ठगी की शुरुआत होती है। इसके बाद कभी पैन नंबर, कभी आधार नंबर, कभी एजेंट कोड न लगने और फिर पुरानी पॉलिसी को कैंसल कराकर फिर नई पॉलिसी के नाम पर गिरोह लोगों से लाखों रुपये की ठगी करता है।
एसपी सिटी ने बताया कि आसिफ प्रत्येक ठगी में से भारत को 45 प्रतिशत हिस्सा देता था। आसिफ ही यह तय करता था कि शिकार से पैसा किसी खाते में जमा करवाना है। आसिफ ने भारत को एटीएम कार्ड भी दे रखा था, ताकि वह अपना तय हिस्सा खुद ही निकाल ले। एसपी सिटी के अनुसार, गिरोह ने कुछ समय पहले मेरठ में रहने वाले डॉ. धीरज कुमार से लगभग 70 लाख रुपये की ठगी की थी। डॉक्टर से ठगी के बाद भारत ने शादी की थी और इसमें काफी खर्चा किया था। वहीं इस ठगी के बाद से ही पुलिस इस गिरोह के पीछे थी।

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