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4 Jul 2019

जीडीए में संपत्ति की फाइलों का डिजिटलाइजेशन कराने के दौरान पकड़ में आया बाबुओं का फर्जीवाड़ा

गाजियाबाद। संपत्ति की फाइलों का डिजिटलाइजेशन कराने के दौरान जीडीए में बाबुओं का फर्जीवाड़ा सामने आया है। अलमारियों में इंदिरापुरम और मधुबन-बापूधाम समेत कई आवासीय योजनाओं की संपत्ति की फाइलें गायब हैं। कई संपत्तियों की डुप्लीकेट फाइलें मिलीं हैं। ऐसे में बड़े हेरफेर की आशंका है। इस मामले में जीडीए वीसी ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर सचिव सीपी त्रिपाठी को जांच सौंपी गई है। पंद्रह दिन में रिपोर्ट मांगी है।
जीडीए हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिग सेंटर से पूरे शहर का वैक्टर मैप बनवा रहा है। ताकि, संपत्तियों का ब्योरा, उनके दस्तावेज और बकाया भुगतान राशि को ऑनलाइन किया जा सके। पहले चरण में मधुबन-बापूधाम और इंदिरापुरम का मैप तैयार करा लिया गया है। दोनों आवासीय योजनाओं की प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल ब्योरा मैप पर टैग किया जाना है। उसके लिए संपत्ति की फाइलों का डिजिटलाइजेशन कराया जा रहा है। इंदिरापुरम कई खंडों में बंटा हुआ है। डिजिटलाइजेशन के लिए अलमारियां खोलने पर मालूम हुआ है कि औसतमन 400 संपत्ति में से 20 की फाइलें गायब हैं। जो ढूंढने से रिकॉर्ड में नहीं मिल रहीं। वहीं मधुबन-बापूधाम की एक अलमारी में आठ फाइलें डुप्लीकेट पाई गई हैं। जबकि, इस आवासीय योजना में बहुत ज्यादा संपत्तियां नहीं बिकी हैं। प्रथम दृष्टया सामने आया है कि आठों फाइलें एक परिवार से जुड़ी हैं। इनमें भुगतान की रसीदें भी लगी हुई हैं। जीडीए अधिकारियों की मानें तो मूल फाइलें गायब करने और डुप्लीकेट फाइलें बनाकर रखने के पीछे फर्जी तरह से संपत्तियों के आवंटन की आशंका लग रही है। ताकि, भुगतान की रसीदों से आवंटन को वैध साबित किया जा सके। यह आशंका भी है कि ऐसा करके एक संपत्ति के दो आवंटी बनाए गए। एक आवंटी असली और दूसरा फर्जी। ताकि, विवाद खड़ा होने पर दोनों दस्तावेज प्रस्तुत कर संपत्ति पर दावा करें। इस विवाद को सुलझाने के लिए एक वही संपत्ति दे दी जाए और दूसरे के नाम अलग संपत्ति कर दी जाए। ठीक वैसे जैसे स्वर्णजयंतिपुरम समेत कई योजनाओं में मामले सामने आ चुके हैं।
मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना की संपत्ति की सभी मूल फाइलों का डिजिटलाइजेशन कर दिया गया है। हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिग सेंटर से यहां का वैक्टर मैप भी प्राप्त हो गया है। प्रवर्तन और संपत्ति अनुभाग से इसका सत्यापन कराकर एक महीने में संपत्ति की डिजिटल फाइलों को मैप पर टैग कर दिया जाएगा। अगस्त में इस क्षेत्र के वैक्टर मैप को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इस मैप पर प्रत्येक संपत्ति की डिजिटल बाउंड्री बनाई गई है। अपनी संपत्ति की बाउंड्री पर क्लिक करके लोग उसका पूर्ण ब्योरा ऑनलाइन देख सकेंगे। बकाया राशि को भी देख सकेंगे। कैलक्यूलेटर दिया जाएगा। उसमें जीएसटी समेत पूरी गणना कर भुगतान कर सकते हैं। इसके अलावा इंदिरापुरम का वैक्टर मैप ऑनलाइन करने में दो से तीन महीने का वक्त लगेगा। पूरे शहर के मैप में एक साल का वक्त लग सकता है। इसका ट्रायल सफल रहा है। पूरे प्रोजेक्ट पर दो करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इंदिरापुरम योजना की कई फाइलें गायब मिली हैं। मधुबन-बापूधाम योजना की संपत्तियों की डुप्लीकेट फाइलें मिल रही हैं। सभी अलमारियों को खंगाला जा रहा है। इस मामले कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। इसे देखते हुए अपर सचिव को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। गड़बड़ी मिलने पर दोषी अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - कंचन वर्मा, वीसी, जीडीए

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