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14 Jul 2019

झिलमिल आग: हाथ में था फोन, लगा अंदर रह गया, दोबारा गईं फैक्ट्री में फिर आई मौत की खबर

मृत संगीता और उनका परिवार
पूर्वी दिल्ली। झिलमिल की फ्रेंड्स कॉलोनी में प्लास्टिक के नल बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगने की वजह से दो महिलाओं और एक युवक की मौत हो गई। दो महिलाओं की मौत के बाद उनके कुल आठ बच्चों के सिर से मां का आंचल छिन गया। दोनों महिलाएं अपना घर चलाने के लिए नौकरी कर रहीं थी। अब दोनों ही परिवारों के सामने यह संकट है कि घर कैसे चलेगा। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कृष्णा विहार कॉलोनी के गली नंबर 11 में रहने वाली मृतक संगीता (40) इस फैक्ट्री में अपना परिवार चलाने के लिए पिछले 10 साल से नौकरी कर रही थीं। उसके पति श्रवण प्रसाद ने बताया कि उनके बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ सकें, इसके लिए पति-पत्नी दोनों ने नौकरी करना शुरू किया था। संगीता की बेटी मुन्नी बीए फर्स्ट इयर की स्टूडेंट है। बड़ा बेटा सन्नी 11वीं में पढ़ता है और छोटा बेटा रोहित छठी में।
संगीता के तीनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। लोनी के आनंद विहार कॉलोनी की रहने वाली मृतक मंजू (50) भी इस फैक्ट्री में पिछले 8 साल से नौकरी कर रही थीं। उनके परिजनों ने बताया कि मंजू के दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ा बेटा मनीष भी अपनी मां के साथ उसी फैक्ट्री में नौकरी करता था। लेकिन मंजू के पति सीताराम और उसके छोटे बेटे सूरज को उसकी मौत के बारे में तब पता चला, जब वह जीटीबी अस्पताल में पहुंचे। जिस युवक की इस घटना में मौत हुई, वह उसका नाम शोएब (19) है।
मृतक संगीता के परिजनों ने बताया कि शनिवार की सुबह उसकी तबियत ठीक नहीं थी। उसका फैक्ट्री जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था। लेकन फैक्ट्री में ऐसा नियम है कि जो वर्कर शनिवार या सोमवार को छुट्टी करता है, उसकी दो दिन की सैलरी काट ली जाती है। संगीता के बेटे सन्नी ने बताया कि मम्मी तबियत खराब होने के बाद भी इसीलिए शनिवार को काम करने गई थीं। हम लोगों के बार-बार मना करने के बाद भी वह नहीं मानीं। अब सन्नी को मलाल है कि काश मम्मी को हमलोगों ने उस दिन फैक्ट्री जाने से रोक लिया होता। संगीता के सहकर्मियों ने बताया कि आग लगने के बाद भी वह खतरे से बाहर थीं। लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि उनका मोबाइल फैक्ट्री के अंदर ही रह गया है। इसकी वजह से वह दोबारा फैक्ट्री में गईं। लेकिन यह उनका भ्रम था। मोबाइल तो उनके हाथ में ही था। दरअसल, बदहवासी में वह समझ नहीं पाईं कि उनका मोबाइल कहां है।

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