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14 Jun 2019

दिल्लीवालों को मिलेगी पैदल चलने की जगह

नई दिल्ली। दिल्ली के वॉकेबिलिटी प्रस्ताव पर जनता की तरफ से कोई आपत्ति सामने नहीं आई है। ऐसे में आज इस प्लान को हरी झंडी मिलने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह प्लान नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) ने तैयार किया है। ऐसे में अब एलजी की मंजूरी मिल जाना लगभग तय है जिसके बाद सभी संबंधित विभाग जिसमें पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, एनडीएमसी, दिल्ली मेट्रो, ट्रैफिक पुलिस, डीएसआईआईडीसी और यूटीपैक के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर डीडीए इस पर काम शुरू कर देगा। इस प्लान के तहत फुटपाथ पूरी तरह अतिक्रमण और अवैध कब्जों से मुक्त होंगे। फुटपाथ और सड़कों के बीच निश्चित ऊंचाई और निचाई होगी। फुटपाथ पर शेल्टर भी जरूरत के मुताबिक लगेंगे। रोड क्रॉसिंग की पूरी व्यवस्था की जाएगी। साथ ही पैदल यात्रियों के लिए संकेतकों और साइन बोर्डों की व्यवस्था होगी। व्यवस्ततम चौराहों पर सब-वे या फुट ओवरब्रिज अवश्य होंगे और पैदल यात्रियों के लिए कुछ दिशा निर्देश भी निर्धारित किए जाएंगे, जैसे सड़क कब और कैसे पार करनी है।इसके अलावा, डीडीए की बोर्ड मीटिंग में कमर्शल बिल्डिंगों को अपार्टमेंट एक्ट की जद में लाने का रास्ता साफ हो गया है।
इससे बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगने के साथ व्यापारियों को सीलिंग का डर भी नहीं रहेगा। इस प्रस्ताव पर भी मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है। आमतौर पर डीडीए के साथ पूरी जमीन का लीज समझौता कर बिल्डर पहले बिल्डिंग बनाते हैं और फिर उसमें बहुत सारे व्यापारियों को जगह बेच देते हैं। बाद में यह बिल्डर व्यापारियों से तो लीज शुल्क लेते रहते हैं, जबकि डीडीए को जमा नहीं कराते। नतीजा, जब कभी सीलिंग की कार्रवाई होती है तो ये व्यापारी फंस जाते हैं और बिल्डर फरार हो जाते हैं। इसी चक्कर में इस समय भी दिल्ली में दो सौ से भी अधिक बिल्डिंग सील पड़ी हैं।
इसी समस्या का समाधान यह अपार्टमेंट एक्ट करेगा। इस एक्ट के तहत व्यापारी अपनी लीज डीडीए के साथ सीधे रख सकेंगे और डीडीए को ही उसका शुल्क भी दे सकेंगे। इससे उन्हें सीलिंग का शिकार नहीं बनना पड़ेगा। मालूम हो कि दिल्ली की तमाम रिहायशी बिल्डिंग तो पहले से ही अपार्टमेंट एक्ट की जद में है, अब कमर्शल बिल्डिंग्स भी इसका हिस्सा बन जाएंगी।

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