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13 Jun 2019

बाड़मेर में भूख से गाय ने तोड़ा दम? साधुओं ने निकाली अंतिम यात्रा


जैसलमेर। बाड़मेर में एक गाय की मौत होने के बाद साधुओं ने विरोध स्वरूप अंतिम यात्रा निकाली। बताया जा रहा है कि भूख की वजह से बुधवार को गाय ने दम तोड़ दिया था। इस दौरान जय गोमाता, जय गोपाला के नारे लगाते हुए साधुओं और आम लोगों ने शव यात्रा निकाली। लोगों का आरोप है कि नैशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एनडीआरएफ) के नियमों में विसंगतियों की वजह से बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में चारे की काफी कमी है। केंद्र और राज्य सरकारों का इस ओर ध्यान दिलाने के लिए अंतिम यात्रा के जरिए विरोध प्रदर्शन किया गया।
आरोप है कि पिछले एक महीने के दौरान राज्य के दो सरहदी जिलों में गायों की बड़े पैमाने पर मौत हुई है। इस मामले में साधु समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लाख पोस्टकार्ड भेजने की तैयारी कर रहा है। इस बीच बाड़मेर-जैसलमेर के प्रभारी मंत्री बीडी कल्ला और इलाके से आने वाले कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद ने चारे की कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड के नियमों की वजह से राहत कैंपों के जरिए चारा मुहैया कराना मुश्किल हो गया है। बाड़मेर के अडिशनल कलेक्टर राकेश कुमार का कहना है कि राज्य सरकार ने जिले में 512 चारा डिपो को मंजूरी दी है और इनमें से 412 काम कर रहे हैं। गाय की अंतिम यात्रा को देखने इकट्ठा हुए लोगों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में बढ़ते तापमान, चारे और पानी की कमी की वजह से मवेशी मर रहे हैं। 
इस मामले में कलेक्टर के दफ्तर के बाहर 4 दिन से प्रदर्शन किया जा रहा है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब साधुओं ने गाय की अंतिम यात्रा निकालकर इस विरोध प्रदर्शन में अपनी हिस्सेदारी दी है। गोसेवा सेवा समिति के महंत रघुनाथ भारती का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार को गायों की चिंता नहीं है इसलिए धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी अफसरों को गायों की मौत पर यकीन नहीं है तो वे हर पंचायत और गांव से मृत गायों के अवशेष बतौर सबूत जिला कलेक्ट्रेट पर लाएंगे।नियम में कमी का आरोप लगाते हुए भारती ने कहा, '8 अप्रैल 2015 को मोदी सरकार ने एनडीआरएफ के नियम बदल दिए और छोटे-सीमांत किसानों के लिए मवेशी कैंपों के जरिए गायों के संरक्षण का प्रस्ताव लागू किया। लेकिन सरकार यह नहीं समझती कि दोनों जिलों में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत की श्रेणी में नहीं आते हैं।' राजस्थान के आपदा प्रबंधन, राहत और नागरिक सुरक्षा के सेक्रटरी आशुतोष पेडनेकर का कहना है कि जैसलमेर में 93 प्रतिशत किसान राहत के लिए योग्य नहीं हैं। वहीं, भारती का कहना है कि अगर गायें वोट दिला सकती हैं तो सरकारों को नियमों में बदलाव करते हुए उनके चारे और पानी का उचित इंतजाम करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'सरकारों के पास पैसा है लेकिन केंद्र और राज्य के स्तर पर नीति बनाने वालों की संवेदना मर चुकी है।'

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