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30 Jun 2019

सरकार को दलितों के उत्थान के लिये कई तरह की योजनाएँ बनाकर उन्हें लाभान्वित करना चाहिए : राकेश सागर

ज्ञान प्रकाश शर्मा,(फर्रूखाबाद)। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं काँग्रेस कमेटी में अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश कुमार सागर पूर्व सूबेदार ने कहा कि पीढी दर पीढी छुआछूत और भेदभाव , उत्पीड़न, दमन, बहिष्कार व तमाम सामाजिक प्रतिबंधो के जरिए कमजोर, लाचार, गरीब एवं अभावग्रस्त हुए दलित शोषित समाज के लिए बाबा साहेब डा.भीमराव अम्बेडकर के दशकों के संघर्ष और तमाम कष्टों के फलस्वरूप ही ब्रिट्रिश हुकूमत से मिले कम्युनल अवार्ड के बदले में पूना पैक्ट 1932 के जरिए महात्मा गांधी और डा.भीमराव अंबेडकर के प्रतिनिधित्व में सवर्ण समाज और अछूत समाज के बीच हुए समझौते के तहत शासन प्रशासन में दलित शोषित समाज का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु ही आरक्षण की व्यवस्था एवं उनकी गरीबी और गैरबराबरी को दूर कर उनका सामाजिक उत्थान करने हेतु अन्य तमाम सुविधाएं देने की सरकार की प्रतिबद्धता को भारतीय संविधान में शामिल कर ही दलितों को आरक्षण देने की संवैधानिक व्यवस्था की गई थी।
लेकिन वर्तमान में वोट की राजनीति के तहत आरक्षण को गरीबी दूर करने का जरिया मान कर तमाम सत्तासीन दलों/सरकारों के द्वारा आज हजारों हजार सालों तक उत्पीडित, अपमानित, बहिष्कृत कर/शोषण कर दीनहीन बनाए गए शोषित समाज को मुख्यधारा से जोड़ने हेतु की गई आरक्षण की व्यवस्था को भी रेवड़ी की तरह बांटने का षणयंन्त्र कर अब न केवल दलितों (अछूतों) के आरक्षण को विवादित बनाकर उनकी हिस्सेदारी को भी हड़पने की एवं पिछड़ों (सछूतों) को भी अपमानित करने की कुटिल साज़िश है ।  बरना इन 17 जातियों का उत्थान करने की भावना अगर इनकी रही होती तो इन सभी जातियों के लिए अन्य कई तरह की योजनाएं बनाकर उन्हें लाभान्वित किया जा सकता है ।

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