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27 Jun 2019

जापान में पीएम मोदी, दुनिया में अवसरों का 'गेटवे' बना भारत

ओसाका। जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने जापान पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया आज भारत को संभावनाओं के 'गेटवे' के तौर पर देखती है। अपनी सरकार के दोबारा चुने जाने को सच्चाई की जीत करार देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने इस प्रधान सेवक पर विश्वास जताया। यह बात सही है कि 1971 के बाद देश ने पहली बार एक सरकार को प्रो-इन्कम्बैंसी जनादेश दिया है। 61 करोड़ लोगों ने भीषण गर्मी में वोट दिया। चीन को छोड़ दें तो दुनिया के किसी भी देश की आबादी से ज्यादा मतदाताओं की यह संख्या थी। पीएम मोदी के इस संबोधन के बाद जय श्री राम के नारे भी लगे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने वंदे मातरम का उद्घोष भी किया। पीएम मोदी ने जापान में बसे भारतीय समुदाय के लोगों से कहा कि आप यहां बैठकर भी हमारे काम का ज्यादा अच्छा आकलन करते हैं। उन्होंने कहा, 'कई बार स्टेडियम में बैठकर मैच देखते हैं तो पता चलता है कि गलती कहां हुई, आउट कैसे हुए। इसलिए जब आप दूर बैठकर मैच देखते हैं तो आपको ज्यादा पता होता है।' पीएम मोदी ने अपनी जीत में प्रवासी भारतीयों के योगदान के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'कुछ लोगों ने अपने गांव के लोगों को चिट्ठियां भेजीं, ईमेल भेजे। आपने भी किसी न किसी तरह से देश को लोकतंत्र को प्राणवान बनाया। 130 करोड़ भारतीयों ने पहले से भी मजबूत बनाया।' उन्होंने कहा कि मानवता के इतिहास में इससे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव नहीं हुआ है। भविष्य में भी इस रिकॉर्ड को कोई तोड़ेगा तो वह भारत ही है। भारतीय होने के नाते तो हम सभी को इस पर गर्व है ही। पूरे विश्व को भी यह प्रेरित करने वाला है।
गांधी जी के तीन बंदर 17वीं सदी के जापान से जुड़े
पीएम मोदी ने कहा, 'जापान के साथ हमारे रिश्तों की एक कड़ी महात्मा गांधी से भी जुड़ती है। संयोग से यह उनकी 150वीं जयंती का भी वर्ष है। उनकी सीख थी कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो। भारत का बच्चा-बच्चा इसे भली-भांति जानता है। बहुत कम लोगों को यह पता है कि जिन तीन बंदरों को इस संदेश के लिए बापू ने चुना वह 17वीं सदी के जापान से जुड़े हैं।'
जापान और भारत में सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
पीएम मोदी ने कहा कि जापान और भारत दोनों ही सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। निस्वार्थ सेवा को सबसे बड़ा धर्म भारत मानता है और जापान ने इसे जीकर दिखाया है। विवेकानंद, टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी समेत तमाम भारतीयों ने जापान और भारत के रिश्तों को मजबूत किया। जापान के मन में भी भारत के लिए प्यार रहा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होने लगे।

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