Latest News

23 Jun 2019

गर्भधारण करते ही महिलाओं को छोडऩा पड़ता है गांव

कन्नौज। जनपद में एक ऐसा गांव है, जहां महिलाओं को गर्भ धारण करते ही गांव छोडऩा पड़ जाता है। यह सिलसिला अब गांव की परंपरा बन चुका है, महिलाओं के इस कदम के लिए पति और घर के सदस्य भी उनका पूरा साथ देते हैं। ऐसा उन्हें अपनी और गर्भस्थ शिशु की जान बचाने के लिए करना पड़ रहा है। गांव में जिन महिलाओं का प्रसव हुआ, उनमें ज्यादातर शिशुओं की मौत हो गई। अपनी पीढ़ी को बचाने के लिए अब ग्रामीण भी महिलाओं को बाहर गर्भ धारण करने के बाद गांव से बाहर भेजने को मजबूर हो रहे हैं । यदि कोई गर्भवती गांव में रहती है तो जन्म लेने वाला नवजात दम तोड़ देता है। सतीश चंद्र, बबलू, संजय, रामपाल आदि ग्रामीण बताते हैं कि कई मामलों में प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा की हालत बिगड़ गई। बच्चे भी कमजोर पैदा होते थे और बीमारी का शिकार होकर दम तोड़ देते थे। पहले तो कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब एक-एक कर कई बच्चे मौत के मुंह में समा गए तो डॉक्टरों ने इसकी वजह बताई। इसके बाद अब हालात ये हैं कि यहां की महिलाएं गर्भधारण करते ही रिश्तेदारों के घर चली जाती हैं। प्रसव के बाद जब तक बच्चा पांच-छह माह का नहीं हो जाता, तब तक वह वापस नहीं लौटतीं हैं। पानी अमृत है, लेकिन गांव सिमरिया के मजरा मदेपुर के लिए ये 'विष' बन गया है। यहां का भूगर्भ जल गर्भस्थ शिशुओं के लिए काल बन रहा है। लोग समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं, टीबी, कैंसर जैसी बीमारियां पैर पसार रही हैं। कई नवजात भी मौत का शिकार हो चुके हैं। यही कारण है कि महिलाएं गर्भधारण करते ही गांव छोडऩे पर विवश हैं। मजरा मदेपुर में रहने वाली दो हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
जवानी में ही बूढ़े दिखने लगे लोग
ग्रामीणों के अनुसार यहां हैंडपंप से पीले रंग का खारा पानी निकलता है। गांव में ज्यादातर लोग तपेदिक बीमारी से ग्रसित हैं और जवानी में ही लोग बूढ़े दिखने लगे हैं। पशु बीमार और कमजोर हो गए हैं। गांव के कई मवेशियों की मौत भी हो चुकी है। गांव में पांच हैंडपंप लगे हैं, इनमें सिर्फ तीन ठीक हैं, जो कि पीला और खारा पानी दे रहे हैं। इस पानी में सोडियम क्लोराइड की मात्रा अधिक होने की वजह से हैंडपंप गलना शुरू हो जाते हैं। श्याम सिंह बताते हैं कि इस वजह से रिश्तेदार आने से भी कतराते हैं, जो आते हैं वे रुकते नहीं। गांव से रूपलाल, हेम सिंह, पन्नालाल, महावीर, लंकुश, विनय, मोहर सिंह, विनोद और हरिशंकर गांव से पलायन कर गए हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वीके शुक्ला ने बताया कि पानी खारा होने से फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो जाती है, इससे व्यक्ति के दांत खराब हो जाते हैं और मेरुदंड (बैक बोन) टेढ़ी हो जाती है। इसके अलावा हाथ-पैरों की हड्डियां भी टेढ़ी हो सकती हैं।
जल निगम ने कभी नहीं की पानी की जांच
जल निगम के अधिशासी अभियंता अवनीश सिंह ने बताया कि वर्ष 2007-08 में यूनीसेफ ने जिले के 133 गांवों का सर्वे किया था। इसमें पानी की गुणवत्ता जांची गई थी। 36 गांवों के भूगर्भ जल की गुणवत्ता खराब मिली थी। इसके बाद जल निगम ने पाइलाइन परियोजना के दौरान पानी चेक किया। जहां पानी खराब मिला था, वहां गहरी बोङ्क्षरग कर शुद्ध पानी की आपूर्ति कर दी गई। सिमरिया गांव और मजरा मदेपुर की रिपोर्ट नहीं है। जल्द ही जांच कराएंगे। कन्नौज के जिलाधिकारी रवींद्र कुमार का कहना है कि यदि किसी गांव में ऐसा है तो बहुत ही गंभीर मामला है। जल निगम की टीम को वहां भेजकर पानी की जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों को जल्द ही शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाएगा।

No comments:

Post a Comment