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19 Jun 2019

दिल्ली पुलिस की किस गलती से पंजाब तक पहुंच गया मुखर्जी नगर बवाल

नई दिल्ली। दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में पुलिस की गाड़ी में टक्कर मारने को लेकर ग्रामीण सेवा के चालक सरबजीत सिंह व मुखर्जी पुलिस के बीच पहले झगड़ा हुआ फिर दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। वीडियो वायरल होने पर धीरे-धीरे विवाद बढ़ता चला गया। पहली बार उत्तर-पश्चिम जिले की डीसीपी बनीं विजयंता आर्या ने शुरू में मीडिया कर्मियों को घटना की जानकारी नहीं देकर मामले को दबाने की कोशिश की। आला अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। जब हालात बेकाबू हो गए तब दूसरे दिन उत्तरी रेंज के संयुक्त आयुक्त मनीष कुमार अग्रवाल थाने तो पहुंचे, लेकिन बाहर आकर स्थानीय लोगों से बातचीत कर उन्हें समझाने बुझाने की कोशिश नहीं की। इससे मुखर्जी नगर में बवाल फैलता चला गया। वह गुस्साई भीड़ का सामना नहीं कर पाए।
एसीपी केसी त्यागी ने जब उन्हें थाने से वापस मुख्यालय जाने के लिए लोगों को हटाने की कोशिश की तब भीड़ ने उनकी भी पिटाई कर दी। अगर समय रहते आला अधिकारी मौके पर पहुंच जाते और हालात को शांत करने की कोशिश करते तब इतना जन आक्रोश नहीं बढ़ता। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस की किरकिरी होने से बच जाती। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब ग्रामीण सेवा और ईआरवी (आपातकालीन प्रतिक्रिया वाहन) में टक्कर हुई थी उस समय ईआरवी में केवल चालक सिपाही ही था। वहां दोनों में झगड़ा हुआ। पास में ही थाने तक बात पहुंची, वहां भी दोबारा पुलिसकर्मियों व सरबजीत के बीच झगड़ा हुआ था।यह पहला मामला है जब इतना बड़ा बवाल हो जाने के बावजूद विशेष आयुक्त कानून एवं व्यवस्था हालात का जायजा लेने मौके पर नहीं पहुंचे। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। इसको लेकर पुलिस आयुक्त ने काफी नाराजगी जाहिर की है। इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मंगलवार को गृह मंत्रालय को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में क्या जानकारी दी गई है इस संबंध में मीडिया से कुछ भी साझा नहीं किया गया है। बताया जाता है कि कुछ आला अधिकारियों के खिलाफ भी रिपोर्ट दी गई है। मंत्रालय से संकेत मिलने के बाद हो सकता है उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाए।
डीसीपी के निलंबन की कार्रवाई से पुलिसकर्मियों में रोष व्याप्त
उधर, इस मामले को लेकर जिन तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की गई, उसकी वीडियो वायरल हो जाने पर पुलिसकर्मियों में गहरा रोष है। जन आक्रोश बढ़ने जब डीसीपी विजयंता आर्या को पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए तब सोमवार शाम को उन्होंने कुछ नेताओं को अपने पास बुलाकर उनसे बातचीत की। यहां पर दो-तीन बड़े नेताओं से ही उन्हें गोपनीय तरीके से बात करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा नेताओं को अपने कमरे में बुला लिया। नेताओं को जब उन्होंने तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने के बारे में जानकारी दी तब उन्होंने असंतृष्टि जाहिर करते हुए निलंबित करने की मांग की। इस पर विजयंता ने तीनों को रात में ही निलंबित करने का लिखित आदेश जारी कर दिया। नेताओं से हुई बातचीत संबंधी वीडियो किसी ने वायरल कर दिया। पूरे मामले में कई स्तर पर पुलिस के आला अधिकारियों की भारी चूक की बात सामने आई है।

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