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5 Jun 2019

जीडीए के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा आईएमटी प्रबंधन

गाजियाबाद। इंस्टीट्यूट ऑफ मैनजेमेंट टेक्नोलॉजी (आइएमटी) ने भूमि आवंटन निरस्त करने और नक्शा निरस्त करने का नोटिस दिए जाने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मंगलवार को सुनवाई में आइएमटी प्रबंधन ने पक्ष रखा है कि नोटिस सक्षम अधिकारी ने नहीं दिया है। जो, कार्रवाई की गई है वह गलत है। जीडीए ने अपनी कार्रवाई को सही बताया है। अब इस मामले अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी। पार्षद राजेंद्र त्यागी ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आइएमटी के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि आइएमटी ने जमीन के कुछ हिस्से पर अवैध कब्जा कर निर्माण कर रखा है। इस मामले में जीडीए ने जांच कराई तो पाया कि आइएमटी को वर्ष 1981 में 11503.34 वर्ग गज जमीन आवंटित की गई थी। तब आइएमटी को 1.95 लाख रुपये देने थे। आवंटन के बाद आइएमटी ने भुगतान नहीं किया। वर्ष 1994 तक जीडीए की तरफ से लगातार भुगतान के संबंध में नोटिस भेजे गए। फिर जीडीए भी पैसा मांगना भूल गया। आइएमटी ने भी भुगतान नहीं किया। जांच के बाद जीडीए ने इतने हिस्से की जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया। साथ ही इस जमीन को शामिल करके वर्ष 2016 में स्वीकृत हुआ नक्शा निरस्त करने का नोटिस भी दे दिया। इसके खिलाफ आइएमटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आइएमटी के निदेशक प्रो. आशीष भट्टाचार्य ने बताया कि याचिका दायर की गई है। केस से संबंधित जानकारी लीगल सेल के पास है।

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