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27 Jun 2019

13 हजार स्वच्छ शौचालय गायब, डीएम ने लगाई क्लास

फर्रुखाबाद। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत विगत दो अक्टूबर 2014 से अभी तक बेस लाइन सर्वे के आधार पर 1.40 लाख लोगों के शौचालय बनवाए जाने का विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है। हाल यह है कि जांच को जाने वाली टीमों को हजारों शौचालय ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। लखनऊ से दिल्ली तक फजीहत के बाद दोबारा सत्यापन कराया गया। अभी तक 600 में से करीब 450 ग्राम पंचायतों की सत्यापन रिपोर्ट आ पाई है। इसमें लगभग 9 हजार शौचालयों की रिपोर्ट में गड़बड़ी है। जाहिर है कि लगभग 12 हजार शौचालय हवा में हैं। शुरुआती दौर में डीपीआरओ कार्यालय से प्रधान की डिमांड पर सीधे ग्राम पंचायत के खाते में भेजा जाता था। पैसा पहुंचने के बाद सूची धरी रह जाती थी और शौचालय अनुदान का अंधे की रेवड़ियों की तरह अपने-अपनों में बंदरबांट हो जाता था। ऊपर से नीचे तक मिली भगत के चलते सत्यापन में भी लीपा-पोती हो जाती थी। अब जब केंद्र और राज्य स्तरीय टीमों ने जांच शुरू की तो मामला खुल कर सामने आ रहा है।
शासन को एमआइएस में गड़बड़ी की रिपोर्ट के बाद नए सिरे से सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में डीपीआरओ अमित त्यागी ने बताया कि बेस लाइन सर्वे के बाद बचे हुए 46 हजार लाभार्थियों की सूची शासन को भेजी गई थी। इनमें से मात्र 20 हजार के लिए अनुदान मिला है। इसके सापेक्ष विभाग की ओर से 12 हजार के शौचालय बनवा दिए गए। गंगा किनारे के 60 ग्रामों में सॉलिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के डीपीआर तैयार कराया जाना है। 150 परिवारों की आबादी पर सात लाख, 300 परिवारों तक 12 लाख, 500 की आबादी तक 15 लाख और इससे अधिक आबादी पर 20 लाख तक खर्च की अनुमति है।

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