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27 Jun 2019

मुखर्जी नगर : विवादित पोस्ट करने वाले पुलिसवाले पर 10 धाराओं में केस की मांग

नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा है कि उसने मुखर्जी नगर में पिछले दिनों एक सिख ड्राइवर के साथ मारपीट से जुड़ी घटना के संबंध में फेसबुक पर विवादित पोस्ट करनेवाले पुलिसवाले के खिलाफ क्या कार्रवाई की। अदालत ने उस शिकायत पर पुलिस से यह ऐक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मंगाई है, जिसमें इस पुलिसवाले के खिलाफ आईपीसी की 10 धाराओं के तहत केस दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है। मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट शीतल चौधरी ने दिल्ली निवासी मंजीत सिंह चुग की शिकायत पर सुनवाई करते हुए पुलिस को यह निर्देश जारी किया और अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख तय कर दी। चुग की अदालत से मांग है कि कोटला मुबारक पुलिस थाने को कथित आरोपी पुलिसवाले सचिन भाटी के खिलाफ उसके विवादित पोस्ट के लिए आईपीसी की 10 धाराओं के तहत केस दर्ज करने और कानून के मुताबिक मामले की जांच करने का निर्देश दिया जाए।ये सभी धाराएं जानबूझकर दंगे भड़काने की कोशिश करना, सम्प्रदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करना, उन्हें डराना-धमकाना, अपमानित करना और देश की अखंडता को खतरे में डालते हुए शांति भंग करने की कोशिशों के आरोपों से जुड़ी हैं।
एडवोकेट एच एस सोढ़ी के जरिए दायर शिकायत में पहले तो अदालत के सामने 16 जून की उस घटना का ब्यौरा पेश किया गया।अदालत को बताया गया कि किस तरह मुखर्जी नगर थाने के कुछ पुलिसवालों ने ग्रामीण सेवा के एक 45 साल के सिख ड्राइवर और उसके माइनर बेटे के साथ कथित बर्बरता की, कैसे उस घटना से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया के जरिए वायरल हुईं और उन वीडियो को देखकर भड़के सिख समुदाय के कुछ लोगों ने कैसे थाने के बाहर प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। खासतौर पर कॉन्स्टेबल सचिन भाटी के खिलाफ आगे कोर्ट को बताया गया है कि कैसे इस पुलिसवाले ने मुखर्जी नगर की इस पूरी घटना को लेकर अपने फेसबुक पेज पर विवादित पोस्ट कर शिकायतकर्ता और उसके परिवार समेत पूरे सम्प्रदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया। आरोप लगाया कि पुलिस की वर्दी और आई कार्ड पहनकर यह गंभीर शरारत करने का आरोपी पुलिसवाला विवादित टिप्प्णी का विरोध होने के बावजूद नहीं रुका और अपमानजनक-नफरत से भरे कॉमेंट करता रहा। शिकायत लेकर कोर्ट आने की वजह बताते हुए शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसने पहले संबंधित थाने से लेकर पुलिस के सर्वोच्च पुलिस अधिकारियों तक से कंप्लेंट की, लेकिन कहीं से भी कोई कार्रवाई होती हुई नजर नहीं आई, इसलिए अदालत आना पड़ा।

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