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14 Apr 2019

मैनपुरी में आखिर कब लगेगा मनमानी पर अंकुश

मैनपुरी। इस शहर में न तो सीएम के आदेश मायने रखते हैं और न ही डीएम के निर्देश। सख्त आदेश हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर कूडे़ के ढेर को जलाया नहीं जाए। बावजूद इसके शहर के कचहरी रोड पर शनिवार दोपहर घंटे भर तक कचरे का ढेर धू-धू कर जलता रहा। जिला अस्पताल के बाहर भरी दोपहरी सड़क किनारे लगी कूडे़ की यह आग किसी भी अधिकारी को नजर नहीं आई।कुछ दिन पहले जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने कचहरी रोड का भ्रमण कर सुबह नौ बजे तक कचरे का उठान कराने के निर्देश पालिका प्रशासन को दिए थे, लेकिन व्यवस्था न बदली। शनिवार दोपहर लगभग एक बजे जिला अस्पताल के दूसरे गेट के बाहर सड़क किनारे कचरे का ढेर लगा रहा। समय पर इसका उठान नहीं हुआ। दोपहर में एक सफाईकर्मी ने इस कूडे़ में आग लगा दी। लगभग घंटे भर तक कचरे का यह ढेर जलता रहा। धुआं और लपटों की गर्मी से आसपास से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पॉलीथिन के साथ जलता रहा मेडिकल वेस्ट कचहरी रोड पर बड़ी संख्या में नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और मेडिकल स्टोर संचालित हैं।
नियम है कि ये अपना मेडिकल वेस्ट सार्वजनिक जगहों पर नहीं फेंक सकते। बावजूद इसके जिला चिकित्सालय के दूसरे गेट पर ग्लब्स, कॉटन, बेंडेज, प्लास्टर, खून से सने हुए कॉटन, सिरिज, नीडिल के अलावा दूसरे प्रकार के प्रतिबंधित मेडिकल वेस्ट यहां लगातार फेंके जा रहे हैं। शनिवार को कूडे़ में लगी आग में प्रतिबंधित मेडिकल वेस्ट के साथ पॉलीथिन, डिस्पोजेबल, कॉर्टन और दूसरे प्रकार का कूड़ा भी जलता रहा। कुछ यूं होती रही कार्रवाई शासन से व्यवस्था को अमल में लाने का जिम्मा जिलाधिकारी को सौंपा गया। जिलाधिकारी ने शहर की जिम्मेदारी अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को सौंप दी। अधिशासी अधिकारी ने इस काम के लिए सफाई इंस्पेक्टर को कहा। सफाई इंस्पेक्टरों ने सफाई नायक से, सफाई नायकों ने सफाई कर्मचारियों से कह दिया। कुछ ऐसा ही स्वास्थ्य विभाग में भी रहा। मेडिकल वेस्ट के लिए सीएमओ ने एसीएमओ से, एसीएमओ ने क्लर्क से, क्लर्क ने दूसरे कर्मचारियों से कहकर पल्ला झाड़ लिया और कार्रवाई की सूचना संबंधित संस्थाओं तक पहुंची ही नहीं। 

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