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14 Apr 2019

हाउसिंग सोसायटी ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर लगाया 3.5 लाख रुपये जुर्माना

मुंबई। सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के खाने का कोई ठिकाना नहीं होता। कुछ भले लोग उन्हें अकसर कुछ ना कुछ खाने के लिए दे दिया करते हैं। हालांकि मुंबई के कांदिवली स्थित एक हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले दो लोगों को यह आदत बहुत महंगी पड़ी है और उन पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर 3.5 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। दरअसल जिस सोसायटी में ये रहते हैं, वहां आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर 2500 रुपये प्रतिदिन जुर्माने का नियम है। कांदिवली पश्चिम स्थित महावीर नगर की निसर्ग हैवेन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की पिछले साल मई में एक सालाना सभा हुई थी। इस सालाना सभा में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए उन्हें खाना खिलाने वालों पर जुर्माने की व्यवस्था की गई थी। सोसायटी में रहने वाली नेहा दतवानी ने बताया, 'आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के अपराध में सोसायटी ने मेरे ऊपर 3.6 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। फरवरी महीने में मेरा मेंटनेंस बिल 3,26,818 आया था। इसके अलावा मेरे ऊपर 21 फीसदी की दर से प्रति महीने ब्याज भी लगाया गया है। मैं मेंटनेंस का भुगतान लगातार समय से कर रही हूं, लेकिन जुर्माने की रकम देने से मैंने साफ इनकार कर दिया है।' बताया जा रहा है कि सोसायटी ने नेहा और सोसायटी में रहने वाले एक अन्य शख्स केतन शाह पर जुलाई में पहली बार 2500 रुपये जुर्माना लगाया। जुलाई महीने में दोनों पर कुल 7500 रुपये जुर्माना लगाया गया। इसके बाद अगले चार महीने दोनों पर 75-75 हजार रुपये जुर्माना लगा। हालांकि जब इन्होंने इस नियम के खिलाफ एक पशु अधिकार संस्था से संपर्क किया, तो उसके बाद जुर्माना लगना तो बंद हो गया मगर ब्याज जुड़ता रहा। केतन शाह ने कहा, 'मैं इस सोसायटी में पिछले 18 सालों से रह रहा हूं और इन कुत्तों को खाना खिलाया है। ये आवारा नहीं हैं, इनका जन्म इसी सोसायटी में हुआ है और ये यहीं रहते हैं। ये जब छोटे थे, तबसे में इनकी देखभाल करता आया हूं। किसी को कभी कोई समस्या नहीं हुई। जुर्माने जैसी व्यवस्था नई कमिटी ने शुरू की है।' 
'आवारा कुत्तों की वजह से हो रही थीं कई समस्याएं'
उधर सोसायटी के चेयरमैन मीतेश वोरा ने हमारे सहयोगी मिरर को बताया, 'इस सोसायटी में 194 फ्लैट्स हैं। हमें सोसायटी के सदस्यों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। साफ-सफाई करने वालों ने सफाई से इनकार कर दिया था। सोसायटी के लोगों पर इन कुत्तों द्वारा हमले की भी कई घटनाएं सामने आईं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए हमने नियम बनाया कि सोसायटी का जो भी सदस्य कुत्तों को खाना खिलाना चाहता है, वह यह काम सोसायटी के बाहर करे नहीं तो उस पर 2500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।' 
'कुत्तों को सोसायटी से नहीं हटाया जा सकता'
नेहा दतवानी ने पशु अधिकार कार्यकर्ता परी मेहता से संपर्क किया। परी ने बताया, 'इन कुत्तों को इनके जन्म स्थान से नहीं हटाया जा सकता। अगर इन्हें यहां से हटाया गया, तो ये भूखे मर जाएंगे मगर कहीं और कुछ नहीं खाएंगे। आप कुत्ते को खाना खिलाने बाहर नहीं ले जा सकते। बाहर इन्हें बाकी कुत्तों से भी खतरा है। ऐनिमल केयर ऐंड प्रोटेक्शन ऐक्ट 2001 के तहत उन्हें किसी तरह की पीड़ा देना एक अपराध है।' 

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