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14 Mar 2019

अफसरों के ठिकानों पर छापे तो बहाना हैं,बड़ों पर ही निशाना है

लखनऊ। इधर लोकसभा चुनावों की घोषणा हुई और उधर आयकर विभाग ने रिटायर आईएएस नेतराम के यहां छापेमारी शुरू कर दी। बड़े पैमाने पर उनके यहां से सम्पत्ति मिलने की बात सामने आ रही है। छापेमारी के समय पर राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएं चल रही हैं। छापों को लेकर नेतराम से ज्यादा चर्चा बीएसपी सुप्रीमो मायावती की हो रही है ...क्योंकि मायावती के मुख्यमंत्री रहते नेतराम उनके प्रमुख सचिव थे और काफी करीबी माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि नेतराम खुद बीएसपी से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। कहीं चर्चा है कि आने वाले चुनावों में खर्च के लिए उनके यहां रकम जुटाई गई थी। फिलहाल नेतराम के यहां हुई छापेमारी के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। लोग कह रहे हैं चुनाव से पहले इस छापेमारी के जरिए माया पर दबाव बनाया जा रहा है। दरअसल यूपी की राजनीति में करीबियों के बहाने बड़े नेताओं पर दबाव बनाने की रस्म पुरानी है। 
बी चंद्रकला के बहाने अखिलेश पर तीर 
आईएएस बी.चंद्रकला के खिलाफ सीबीआई ने हमीरपुर में अवैध खनन के मामले में केस दर्ज किए। उनके यूपी और आंध्र प्रदेश के ठिकानों पर छापेमारी की थी। सीबीआई ने यह कार्रवाई मायावती और अखिलेश यादव की दिल्ली में हुई मुलाकात के ठीक एक दिन बाद की थी। कहा गया कि यूपी में एसपी और बएसपी का गठबंधन न हो इसलिए छापेमारी की गई। एफआईआर में पूर्व सीएम अखिलेश यादव व पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को घेरने की कोशिश की गई। समाजवादी पार्टी ने यह मुद्दा लोकसभा तक में उठाया था। 
विस चुनाव से पहले यादव सिंह 
विधानसभा चुनाव-2017 से पहले भी नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजिनियर और एसपी व बएसपी दोनों सरकार के करीबी रहे यादव सिंह पर सीबीआई का शिकंजा कसना शुरू किया था। यादव सिंह के यहां बड़े पैमाने पर काली कमाई से जुड़े साक्ष्य मिले थे। इस मामले में सीबीआई की जांच की लपटें एसपी और बएसपी के कद्दावर नेताओं के करीबियों तक पहुंच गईं। हालांकि अभी तक मामला यादव सिंह और उसके परिवार पर ही अटका है। 
रिवर फ्रंट से शिवपाल पर छींटें
गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में सबसे ज्यादा चर्चा में रिटायर्ड सुपरिटेंडेंट इंजिनियर रूप सिंह यादव रहे। ईडी और सीबीआई जांच का शिकंजा भी सबसे ज्यादा रूप सिंह पर ही कस रहा है। दरअसल रूप सिंह को एसपी के पूर्व मंत्री और वर्तमान में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का सबसे करीबी माना जाता है। 
यूपीएससी भर्ती घोटाले की जद में मुलायम परिवार का करीबी 
एसपी सरकार में उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा की गई 600 से ज्यादा भर्तियों की सीबीआई जांच चल रही है। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष अनिल यादव को मुलायम परिवार करीबी माना जाता है। चूंकि ज्यादातर भर्तियां अनिल यादव के ही कार्यकाल में हुई थीं तो जाहिर है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी उन पर शिकंजा कसेगा और उन्हें इस कुर्सी पर बैठाने वालों पर दबाव बढ़ेगा। 
पहले भी हुए मामले 
पहले भी एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई ने आईएएस प्रदीप शुक्ला के बहाने बीएसपी सुप्रीमो मायावती को घेरने की कोशिश की थी। प्रदीप शुक्ला को बीएसपी सरकार के पसंदीदा अफसरों में गिना जाता था। उस दौरान केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2017 के अप्रैल माह में माया सरकार में ओएसडी रहे और बीएसपी सुप्रीमो के करीबा यशपाल त्यागी के यहां आयकर विभाग के छापे पड़े थे। उस दौरान भी उन छापों को बीएसपी सुप्रीमो से जोड़कर देखा गया था। 

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