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31 Jan 2019

झोपड़ी में रहते हैं विधायक सीताराम, जनता ने घर बनवाने के लिए जुटाया चंदा : मध्य प्रदेश

मुरैना। मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक सीताराम आदिवासी (60) गरीबी के चलते अपनी पत्नी के साथ आज भी कच्चे मकान में रहते हैं। हालांकि, स्थानीय लोग नहीं चाहते कि उनका विधायक कच्चे मकान में रहे, लिहाजा लोगों ने आपसी सहयोग से चंदा करके पैसे इकट्ठे किए हैं, जिससे सीताराम का पक्का मकान बनवाया जा रहा है। सीताराम ने पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेता रामनिवास रावत को शिकस्त दी थी। सीताराम का इस सीट से यह लगातार तीसरा चुनाव था। वह साल 2008 और 2013 में रामनिवास रावत (कांग्रेस) से चुनाव हार गए थे। उनका रहन-सहन ठेठ गंवई अंदाज का है। इन दिनों वह शाम के समय अपनी झोपड़ी के बाहर खटोली (छोटी खटिया) पर बैठकर आग तापते नजर आ जाएंगे, तो सुबह में शॉल ओढ़े और धूप सेंकते हुए अपनों की पंचायत करते हैं। यह नजारा आम है। 
स्थानीय लोगों ने विधायक के लिए जुटाया पैसा 
सीताराम श्योपुर जिले के कराहल विकासखंड के पिपरानी गांव के रहने वाले हैं। इसी गांव में अब उनका दो कमरों का छोटा सा पक्का मकान बनाया जा रहा है। उनकी कोई संतान नहीं है। विधायक सीताराम को चाहने वाले स्थानीय नागरिक धनराज का कहना है कि उन लोगों को अच्छा नहीं लगता कि उनका जनप्रतिनिधि झोपड़ीनुमा घर में रहे। यही कारण है कि उनके चहेतों ने चंदा करके पक्का मकान बनाने की योजना बनाई है और इस पर अमल भी शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीताराम हमेशा उनके लिए संघर्ष करते रहे हैं। जब जहां जरूरत होती है, वह साथ जाने से नहीं हिचकते। इसीलिए सभी चाहते हैं कि विधायक उनके बीच रहे। यही कारण है कि लोगों ने उनका मकान बनाने के लिए चंदा इकठ्ठा किया है। वहीं, विधायक सीताराम ने कहा, ‘मेरे पास पैसा नहीं है, इसलिए अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता हूं। लोगों ने सहयोग के तौर पर पक्का मकान बनाने के लिए मुझे 100 से 1000 रुपये दिए हैं। ये पैसे लोगों ने मुझे विजयपुर सीट से जीतने के बाद स्वागत के दौरान दिए। इतना ही नहीं, विजयपुर में मुझे जनता ने सिक्कों से भी तौला है। इस रकम से मकान निर्माण का शुरू कर दिया गया है।’ 
संपत्ति के नाम पर भी ज्यादा कुछ है नहीं 
सीताराम की पत्नी इमरती बाई का कहना है, 'मेरे पति और परिवार लंबे अरसे से संघर्ष करता आ रहे हैं, अब दिन फिरे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में स्थिति सुधरेगी और जीवन सुखमय होगा।' सीताराम तो जनता के काम को ही अपना काम मानते हैं, इसलिए जनता भी उन्हें अपना मानती है। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के लिए सीताराम ने जो शपथ पत्र दिया है, उसके अनुसार उनके पास केवल 46,733 रुपये हैं, जिनमें से 25,000 नकद और 21,733 रुपये दो बैंक खातों में हैं। इसके अलावा, उनके पास 2.817 एकड़ जमीन और 600 वर्ग फुट की झोपड़ी है, जो उन्हें विरासत में मिले हैं। इनकी अनुमानित बाजार मूल्य करीब 5,00,000 रुपये है। 

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