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31 Jan 2019

ठेकेदार ने 'तोड़े' हाथ, न बीवी के आंसू पोंछ पा रहा, न बच्चों का पेट भर पा रहा

गाजियाबाद। 'मैं गरीब और कमजोर हूं। मेरे बच्चे भूखे हैं। पत्नी मेरी हालत देखकर रो पड़ती है और मैं इतना लाचार हूं कि ना तो बीवी के आंसू पोंछ सकता हूं और न बच्चों का पेट भर सकता हूं।' यह दर्द है हरसेवक का। वसुंधरा सेक्टर 11 में रहने वाले हरसेवक एक राजमिस्त्री हैं। 8 जनवरी उनकी एक ठेकेदार से बहस हो गई थी, जिसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। उनके दोनों हाथ में फ्रैक्चर हो गया है। वह नोएडा के बिसरख में एक बिल्डर के यहां काम करते थे।उनका आरोप है कि काम करते समय लकड़ी के ठेकेदार से उनकी कहासुनी हुई थी। इसके बाद उसने अपने लोगों के साथ मिलकर उनके दोनों हाथ तोड़ दिए। तब से चार बच्चों के पिता हरसेवक बिस्तर पर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घरों में साफ-सफाई का काम करती है। दोनों मिलकर घर का खर्चा चला लेते थे लेकिन उनके बिस्तर पर लेट जाने के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया है। इस मामले में अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
दर्द से कहराता रहा, नहीं की किसी ने मदद 
हरसेवक उस दिन को याद करते हुए रो पड़े। उन्होंने बताया कि जिस साइट पर वह महीने से काम कर रहे थे, वहां पर किसी ने उनकी मदद नहीं की। बुरी तरह से घायल होने के बाद उन्हें गाड़ी के अंदर एक जानवर की तरह डाल दिया गया। वहां वह दर्द से कहराते रहे। रात में लोग उन्हें घर छोड़ गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ। हरसेवक ने बताया कि उनकी दाएं हाथ की अंगुली और अंगूठे का ऑपरेशन होना है। प्लास्टर कटने के बाद ही यह हो पाएगा। वह साथ में काम करने वालों से उधार मांगकर इस समय अपना इलाज और परिवार का खर्चा चला रहे हैं। उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उसके बाद ही हाथ कितना काम कर पाएगा तभी मालूम चल पाएगा। 

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