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31 Jan 2019

लोक नायक अस्पताल में के सैलरी घोटाले में केस दर्ज

नई दिल्ली। लोक नायक अस्पताल में जूनियर और सीनियर डॉक्टर्स के नाम वाले सैलरी अकाउंट्स में कई-कई लाख रुपये ट्रांसफर करके 1.29 करोड़ से ज्यादा की रकम गबन करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस बाबत आईपी एस्टेट पुलिस ने कल धोखाधड़ी, जालसाजी, षड्यंत्र आदि दफाओं में केस दर्ज किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है, फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। अस्पताल के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला 2012 से 2014 के बीच हुआ था, जिसमें लंबे समय तक विभागीय जांच चलती रही थी। आखिरकार सैलरी विभाग से जुड़े कुछ क्लर्कों की संलिप्तता पाई जाने पर विभागीय कार्रवाई हुई थी। रुपयों की रिकवरी भी की गई थी। उसके बाद से मामला ठंडा बस्ते में चला गया। इस केस में अस्पताल के तत्कालीन मेडिकल सुपरिंटेंडेंट वाई. के. सरीन व एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी की जांच रिपोर्ट भी दाखिल हुई थी। इसमें जूनियर और सीनियर डॉक्टरों के नाम पर बने उन 10 अकाउंट्स की पूरी डिटेल है, जिनमें लाखों रुपये ट्रांसफर करके सवा करोड़ से ज्यादा का गबन किया गया। यह सही है कि सैलरी ट्रांसफर करने वाले 'कर्ता-धर्ता' इस केस में मुख्य आरोपी हैं। वे पहचाने भी जा चुके हैं, लेकिन पुलिस से उन अकाउंट्स की भी जांच करने का अनुरोध किया गया था, जिनमें लाखों रुपये ट्रांसफर हुए थे। केस में उन सभी डॉक्टर्स के नाम व पद की जानकारी दी गई है, जिनके नाम पर बनाए गए अकाउंट्स में लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। हालांकि अस्पताल प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उन डॉक्टर्स के केवल नाम का इस्तेमाल हुआ था। उनमें एक-दो लेडी डॉक्टरों के नाम भी थे। उनका गबन से कोई संबंध नहीं था। उनके नाम पर अकाउंट चलाने वाले दूसरे लोग थे। पुलिस अब उन्हीं का पता लगाएगी। 
ऑडिट रिपोर्ट से खुला था फर्जीवाड़ा 
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सैलरी घोटाले का खुलासा एक ऑडिट रिपोर्ट से हुआ था। रिपोर्ट अप्रैल 2015 में सामने आई। उसके बाद विभागीय जांच चलती रही। उस दौरान सैलरी बनाने वाले एक एलडीसी को निलंबित किया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उसने पूरे घोटाले की जिम्मेदारी खुद ले ली थी। इसके बावजूद यह सवाल बाकी रह गया कि जिन डॉक्टर्स के नाम वाले अकाउंट्स में 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए, वह असल में कौन संचालित कर रहा था। इस बारे में पुलिस से जांच का अनुरोध किया गया। पुलिस के पास भी काफी समय से मामले की जांच लंबित रही। आखिर प्रथमदृष्टया साक्ष्यों के बिनाह पर केस दर्ज कर लिया गया। यह पुराना घोटाला है, जिसमें विभागीय जांच के बिनाह पर अकाउंट्स डिपार्टमेंट्स के कुछ क्लर्कों पर कार्रवाई हुई थी। रिकवरी भी की गई थी। इस मामले में पुलिस द्वारा केस दर्ज करने की जानकारी फिलहाल अस्पताल प्रशासन को नहीं मिली है। जानकारी ली जा रही है। @डॉ. किशोर सिंह, मेडिकल डॉयरेक्टर, लोक नायक 

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