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5 Dec 2018

शीशा अंदर को मोड़कर रखने वाले ऑटोवालों का काटें चालान: दिल्ली हाई कोर्ट

नई दिल्ली। एक हादसे में 5 साल के बच्चे की जान भी जा सकती थी, लेकिन चमत्कारि रूप से वह बच गया। इस केस ने दिल्ली हाई कोर्ट ने उन ऑटोरिक्शावालों पर सख्ती करने का आदेश दिया है, जो रफ्तार का ध्यान नहीं रखते और रियर व्यू मिरर(जिस मिरर से पीछे का ट्रैफिक नजर आता है) को अंदर की ओर मोड़कर रखते हैं। कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया है कि ऐसे ऑटोवॉलों का चालान काटा जाए जो रियर-व्यू मिरर को मोड़कर चलते हैं। कोर्ट ने पाया कि हादसे के कई मामलों में ड्राइवर वाहन के रियर-व्यू मिमर को अंदर की तरफ मोड़कर रखते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस से ऐसा करने वाले ऑटो ड्राइवरों का चालान काटने के लिए कहा है। कोर्ट ने दिल्ली ट्रांसपॉर्ट विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि गाड़ियों के रियर व्यू मिरर गाड़ी के बाहर ही लगे हों।हाल मे दिए ऑर्डर में जस्टिस नाजमी वाजिरी ने स्पष्ट किया कि शहर में गाड़ी चलाते हुए ऑटोवोलों को लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि रियर-व्यू मिरर के बाहर की ओर रहने से उसे कोई डैमेज हो सकता है। यह कहते हुए उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गाड़ियों का रियर-व्यू मिरर हमेशा गाड़ी के बाहर की ओर ही होना चाहिए। 
कोर्ट ने कहा, 'दिल्ली ट्रैफिक पुलिस उन ऑटोवालों पर ऐक्शन लेगी जो रियर व्यू मिरर को अंदर की ओर मोड़कर चलते दिखाई देंगे, लेकिन साथ ही ट्रांसपॉर्ट कमिश्नर भी कुछ कदम उठा सकते हैं, जैसे ऐसी गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट न इशू करें जो ऐसा करते हों। कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि गाड़ी के रियर व्यू मिरर गाड़ी के बाहरी हिस्से के साथ वेल्डेड हों।' जल्टिस वाजिरी ने ये निर्देश एक एफआईआर को रद्द करते हुए दिए, जिसके मुताबिक एक ऑटोरिक्शा ने बच्चे को कुचल दिया था, लेकिन चमत्कार था कि वह बच गया। दोनों पार्टियों ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट कर लिया था, जिसमें आोरपी ने पीड़ित परिवार को 30,000 रुपये दिए। कोर्ट ने केस रद्द किया लेकिन साथ ही ऐसे हादसों की वजह पर बात करना जरूरी समझा। 

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