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28 Dec 2018

रेत माफियाओं पर नहीं लग रहा अंकुश : अनूपपुर

सुमिता शर्मा,(अनूपपुर)। वन परिक्षेत्र डोला व राजनगर के जंगलों में धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है और प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों ने यह कहा कि रेत माफियाओ  को जंगल विभाग  के ही अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है
जंगलों से निकल रही रेत- पौराधर राजनगर व डोला क्षेत्र के नदी नालों से धड़ल्ले के साथ वन विभाग की भूमि  से  रोजाना 15 से  20  ट्रॉली रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है राजनगर क्षेत्र से जुड़े जंगलों से ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रेत का परिवहन जारी है, यह रेत  क्षेत्र  सटे जंगल एवं छोटे बड़े नालों से निकाली जा रही है बताया जाता है कि इस रेत का कारोबार करने वाले लोगों को फॉरेस्ट विभाग का पूरा संरक्षण प्राप्त है जिससे रेत का अवैध कारोबार चल रहा है इससे शासन को प्रतिदिन लाखों का नुकसान उठाना  पड़ रहा है साथ ही जिले में बैठे अधिकारियों की भी छवि धूमिल हो रही है वन विभाग की जमीन से अवैध उत्खनन रोजाना हो रहा हैसूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे कारोबार में लगभग 6 से 7 कारोबारियों के द्वारा यह कार्य का संचालन किया जा रहा है यह राजनगर क्षेत्र से सटे जंगलों के अंदर कुल्हड़िया नाला  भलमुडी जंगल डूमरकछार एवं अन्य स्थानों से रेत निकाल कर कालरी कॉलोनी की रिपेयरिंग किया जा रहा है एवम अवैध कमाई के चक्कर में जंगल विभाग के अधिकारी इन माफियाओं को खुला संरक्षण दिए हुए हैं रेत के इस कारोबार से राजस्व को तो चूना लगा ही रहा है लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारी आंख में पट्टी बांधकर सो रहे हैं ग्रामीणों ने बताया कि रेत का अवैध कारोबार अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है जबकि वन विभाग के डिप्टी रेंजर तुलसीदास को पुख्ता जानकारी देने के बाद भी अधिकारी कार्यवाही नहीं करते हैं । जंगल क्षेत्र में मनमाना रेत के अवैध उत्खनन से पर्यावरण को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थानीय अधिकारी रेत माफियाओं के चंद रुपयों के टुकड़ों में बिके हुए नजर आ रहे हैं 
क्या करते हैं साहब- सूत्रों की माने तो जंगल विभाग द्वारा इस पूरे क्षेत्र का जिम्मा जिस अधिकारी को दिया गया है उस अधिकारी की रेत माफियाओं के साथ अच्छी सेटिंग है साहब का माफियाओं के साथ मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि आज तक इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने यह जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई माफियाओं ने फॉरेस्ट विभाग अधिकारियों की सेवा करके जैसे खुला संरक्षण ही ले रखा हो रेत निकालने की भी सेटिंग इतनी अच्छी बना ली है कि सुबह 5:00 बजे से 10:00 बजे तक इसके बाद जरूरत पड़ी तो दोपहर में 1:00 से 3:00 बजे तक का टाइम भी ले लिया है जबकि क्षेत्र में सड़कों के माध्यम से रेत सभी जगह जा रही है लेकिन  इन रेत माफियाओं को खुला संरक्षण वन विभाग द्वारा दिया गया है वन विभाग के अधिकारी और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों ने राजनगर क्षेत्र में कोई कार्यवाही नहीं की जिससे इन रेत माफियाओं के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं ना कहीं ऊपर बैठे अधिकारियों को भी इन माफियाओं को संरक्षण प्राप्त है  तभी तो इन रेत माफियाओं के ऊपर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की जा रही हैं।
कोतमा रेंजर,अशोक निगम का कहना है- क्षेत्र में अगर वन विभाग की भूमि से रेत उठ रही है और हमारे कर्मचारी कार्यवाही नहीं करते तो मैं जानकारी लेता हूं और अगर उनके रेत माफियाओं के साथ मिलने की जानकारी मिलती है तो उन पर भी सख्त कारवाही की जाएगी 



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