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7 Dec 2018

आर्मी की तैयारी कर रहा सुमित बजरंगदल का कार्यकर्ता कैसे हो गया?' : बुलंदशहर हिंसा

बुलंदशहर। बुलंदशहर जिले के गढ़ रोड स्थित स्याना कस्बे से तकरीबन चार किलोमीटर की दूरी पर चिंगरावठी गांव बसा हुआ है। गांव में रहने वाले अमरजीत सिंह की उम्र लगभग 62 वर्ष हो चुकी है और उन्होंने बुलंदशहर हिंसा में अपना सबसे छोटा बेटा सुमित (18) खो दिया है। सुमित को लेकर लोगों के जेहन में तमाम सवाल हैं। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विडियोज में पत्थरबाजी करते हुए दिख रहे शख्स को सुमित बताया जा रहा है, सवाल उठाया जा रहा है कि पुलिस पर पथराव करने वाले व्यक्ति को मुआवजा क्यों दिया जाए। हालांकि, एनबीटी ऑनलाइन से पिता अमरजीत सिंह और सुमित के बड़े भाई विनीत कुमार कहते हैं कि विडियो में जो दिख रहा है वह सुमित नहीं है। हमें जबरन शिकार बनाया जा रहा है, फंसाया जा रहा है। अमरजीत सिंह बताते हैं कि उनका भरणपोषण खेती से हो रहा था। परिवार में अमरजीत सिंह की पत्नी गीता देवी, चार बेटियां बबली, अंजू, मीनू और मंजू के साथ-साथ दो बेटे विनीत कुमार (20) और सुमित भी था। अमरजीत की दो बेटियों बबली और अंजू की शादी हो चुकी थी। वह बताते हैं कि परिवार की हालत ठीक न होने की वजह से मंजू और मीनू नोएडा में नौकरी करती हैं। मृतक के पिता ने बताया, 'सुमित ने हाई स्कूल किसान इंटर कॉलेज बरौली से किया था। इसके बाद उसे मैंने नोएडा भेज दिया, जहां से उसने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की। फिलहाल, वह प्राइवेट रूप से बीए सेकंड ईयर की पढ़ाई चिंगरावठी से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक कॉलेज से कर रहा था।' सुमित के पिता का कहना है, 'हाई स्कूल के बाद से ही सुमित अपनी दो बहनों (मीनू और मंजू) के साथ नोएडा में रहता था।' अमरजीत सिंह 3 दिसंबर को हुई हिंसा का जिक्र करते हुए बताते हैं, 'वह (सुमित) लगभग 20-25 दिन से गांव आया हुआ था। सुमित सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था, एनडीए वगैरह का एग्जाम दे चुका था। उसके घुटने के नीचे नस में दिक्कत हो गई थी। जब वह दीपावली में घर आया तो मैंने उसे गढ़मुक्तेश्वर के करीब एक रिटायर्ड डॉक्टर को दिखाया। वह अब सही हो गया था और वापस लौटने की तैयारी ही कर रहा था। पड़ोस में 13 (दिसंबर) तारीख को शादी थी। सुमित कहने लगा कि पापा कहिए तो मैं शादी देखकर चला जाऊंगा वरना मुझे वापस आना पड़ेगा। सुमित ने कहा कि बहन भी शादी में आएंगी तो मैं उनके साथ ही लौट जाऊंगा। इसके बाद मैंने दोनों बेटों (विनीत और सुमित) को पास में ही डिफेंस की तैयारी के लिए कोचिंग भेजना शुरू कर दिया।' अमरजीत सिंह बताते हैं, 'सुमित से बड़े और चार बहनों में छोटे विनीत ने भी आर्मी की एक-दो भर्ती देखी हैं। उस दिन बुलंदशहर के पास इज्तिमा था, जिसकी वजह से बसें बंद थीं। सुमित के पास दोस्त का फोन आया कि बसें बंद हैं तो मैं कोचिंग नहीं जा रहा हूं। सुमित ने मुझसे पूछा कि पापा बाइक से चले जाएं। इस पर मैंने कहा कि बसें बंद हैं तो बाइक से न जाओ। आज घर में ही पढ़ो।' सुमित के पिता कहते हैं, 'वह सोच रहा था कि यदि आर्मी वगैरह में भर्ती न हो पाया तो वह ग्रैजुएशन कर ले ताकि दरोगा की भर्ती देख सके, इस वजह से वह बीए कर रहा था।' "दोनों इंतजार कर रहे थे तभी स्याना की ओर से लोग हाथ में मशाल, लाठी-डंडे लेकर आते हुए दिखे। इसी दौरान मेरे बेटे को गोली लग गई।"
सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने हिंसावाले दिन को याद करते हुए बताया, 'घटनावाले दिन चिंगरावठी पुलिस चौकी में शोर हो रहा था, वहां से उनके घर की दूरी 400-500 मीटर है। घटना के दिन सुमित का एक दोस्त आ गया था, बसें बंद होने की वजह से उसने बेटे से कहा मुझे किसी परिचित के साथ गाड़ी में बैठा दो तो मैं निकल जाऊंगा। यह सुनकर मैंने कहा कि जब तक हुड़दंग बंद नहीं हो जाता तब तक कहीं नहीं जाना है। कुछ देर बाद शोर बंद हो गया तो बेटे के दोस्त ने कहा सुमित को साथ भेज दीजिए अंकल तो मैं निकल जाऊं। दोनों वहां से चले गए। चिंगरावठी चौकी के पास ही चौराहे के पास दोनों इंतजार कर रहे थे तभी स्याना की ओर से लोग हाथ में मशाल, लाठी-डंडे लेकर आते हुए दिखे। इसी दौरान मेरे बेटे को गोली लग गई।' "वह मुझे सुमित नहीं लग रहा है क्योंकि मात्र 10 मिनट या 9 मिनट में ही मुझे फोन आ गया। गोली लगने वाला विडियो मैंने देखा है लेकिन किसने मारी है यह मैं नहीं जान पाया।"-अमरजीत सिंह, सुमित के पिता
'विडियो में दिख रहा शख्स सुमित नहीं'
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विडियो, जिसमें कथित तौर पर सुमित दिखाई दे रहा है इस पर अमरजीत सिंह कहते हैं, 'वह मुझे सुमित नहीं लग रहा है क्योंकि मात्र 10 मिनट या 9 मिनट में ही मुझे फोन आ गया। गोली लगने वाला विडियो मैंने देखा है लेकिन किसने मारी है यह मैं नहीं जान पाया।' बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर कहा था, 'कश्मीर में जो पुलिसकर्मियों को मारता है, उनसे हथियार छीनता है उसे आतंकवादी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में इन हत्यारों को नायक के रूप में पेश किया जाएगा। इन्स्पेक्टर वाले विडियो के आखिरी वक्त में भीड़ को यह कहते हुए सुना जा रहा है, 'मारो, उसकी बंदूक ले लो।' यही नहीं, विडियो को लेकर मृतक सुमित कुमार को मिलने वाले मुआवजे पर भी सवाल उठाए गए। 
उमर अब्दुल्ला के बयान पर अमरजीत सिंह का कहना है, 'जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक की गोलियां चलाई जाती हैं। वह भी टांगों में मारी जाती हैं और यहां यूपी में...मान लिया मैंने कि मेरे बेटे ने पत्थर भी मारे तो सीने में गोली नहीं मारी जाती। पुलिस को कोई अधिकार नहीं है कि सीने में गोली मार दे। एक इन्स्पेक्टर मरा है और एक मेरा बेटा भी मरा है। वह (सुबोध कुमार सिंह) आज इन्स्पेक्टर थे, मेरा बेटा इन्स्पेक्टर बन सकता था।'  लिए शहीद का दर्जा चाहता है परिवार सरकार की ओर से दिए जा रहे मुआवजे से सुमित का परिवार संतुष्ट नहीं है। अमरजीत कहते हैं, 'मैं बहुत गरीब और छोटा किसान हूं। मेरी दो बेटियां कुंवारी बैठी हैं। मैं चाहता था कि मेरे बेटे को भी शहीद का दर्जा मिले। इन्स्पेक्टर के बराबर ही मुआवजा मिले।' "भाई के पास जब पहुंचा तो वहां इस बात का शोर था कि इन्स्पेक्टर ने सुमित को गोली मार दी। 4 दिसंबर को जब हम अपने भाई का शव लेकर अपने गांव में आए तो प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इन्स्पेक्टर सुबोध की तर्ज पर सभी चीजें मुहैया कराई जाएंगी।मृतक सुमित के भाई विनीत बताते हैं, 'घटना के वक्त मैं घर में था। मुझे जैसे ही इस घटना के बारे में पता चला मैं साइकल से वहां पहुंचा।' वह कहते हैं, 'सुमित गांव गढ़िया के रहने वाले अरविंद के साथ गया था। यह चिंगरावठी से 5-6 किलोमीटर की दूरी पर है।' घटना का जिक्र करते हुए विनीत कुमार कहते हैं, 'मैं घटनास्थल पर पहुंचा। वहां भाई (सुमित) सड़क पर खून से लथपथ हालत में पड़ा हुआ था। पास में ही एक बाइक खड़ी हुई थी। बाइक पर मैं भाई को लेकर स्याना के एक अस्पताल पहुंचा। भाई के पास जब पहुंचा तो वहां इस बात का शोर था कि इन्स्पेक्टर ने सुमित को गोली मार दी। 4 दिसंबर को जब हम अपने भाई का शव लेकर अपने गांव में आए तो प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इन्स्पेक्टर सुबोध की तर्ज पर सभी चीजें मुहैया कराई जाएंगी। हम चाहते हैं कि निष्पक्ष न्याय हो। विडियो में हो सकता है छेड़छाड़ की गई हो।' 
'चार साल से यहां नहीं था सुमित, बजरंगदल का कार्यकर्ता कैसे?'
विनीत कुमार कहते हैं, 'जो लड़का चार साल से यहां था ही नहीं, उसे बजरंगदल या आरएसएस अपना कार्यकर्ता बता रहे हैं। सुमित किसी का कार्यकर्ता नहीं था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।' विनीत ने एक हैरान करने वाली बात यह भी बताई कि कुछ लोगों ने उन्हें खुद को मीडिया से बताकर उनसे फोटोज वॉट्सऐप पर मांगी। बाद में फोटो मांगने वालों की वॉट्सऐप डीपी देखी गई तो उसमें हिंसा के आरोपी माने जा रहे बजरंगदल के नेता योगेश राज की तस्वीर लगी हुई थी। इस बात से नाराज परिवारवालों ने कहा कि वह इस बात की शिकायत पुलिस को भी देंगे क्योंकि उनके साथ साजिश की जा रही है। 

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