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1 Dec 2018

मौत की छलांग से पहले ACP किस अफसर से मिले : नई दिल्ली

नई दिल्ली। सुबह की ऑफिस टाइमिंग और पुलिस मुख्यालय में रोज की तरह चहल-पहल। अचानक तेज धड़ाम की आवाज। फिर पुलिस मुख्यालय में अफरातफरी के बीच हर किसी की जुबां पर 'क्या हुआ'? गुरुवार सुबह एसीपी प्रेम बल्लभ शर्मा की मौत से हर कोई सन्न रह गया। ऑन ड्यूटी पुलिस अफसर के सूइसाइड की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है। महकमे में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जी रही है कि कूदने से पहले उन्होंने किससे बात की थी। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह निजी कारणों से डिप्रेशन में थे या फिर इसके पीछे महकमे से जुड़ी कोई कहानी है। एसीपी प्रेम बल्लभ रोज की तरह दफ्तर आए। पुलिस मुख्यालय की दसवीं मंजिल पर पहुंचे। फिर दफ्तर की खिड़की से गिरकर मौत हुई। पिछले महीने उन्होंने बीमारी के कारण करीब 28 दिन छुट्टी भी ली थी। कुछ दिन वह जीटीबी अस्पताल में भी भर्ती रहे। आशंका है कि इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। 
पुलिस कमिश्नर ने उचित मदद का दिया भरोसा 
परिजन उनके अचानक सूइसाइड करने की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि आत्महत्या करने से पूर्व प्रेम बल्लभ किसी सीनियर अफसर से मिलकर अपने दफ्तर के रूम में लौटे थे। इसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि सीनियर अफसर इससे इनकार कर रहे हैं। वहीं आईपी इस्टेट पुलिस मुख्यालय की सीसीटीवी फुटेज से मामले की छानबीन कर रही है। हालांकि हादसे के तुरंत बाद पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक एलएनजेपी हॉस्पिटल जाकर परिजनों से मिले। उनको सांत्वना देते हुए उचित मदद का भरोसा दिया। 
समय से पहले मांग रहे थे रिटायरमेंट 
वैसे तो कहा जा रहा है कि डिप्रेशन के लिए उनका जीटीबी अस्पताल से इलाज भी चल रहा था। हो सकता है कि इसी वजह से प्रेम बल्लभ ने स्यूसाइड किया हो। वहीं परिवारिक सूत्रों का कहना है कि पिछले काफी समय से प्रेम बल्लभ डिपार्टमेंट से वीआरएस मांग रहे थे, लेकिन वीआरएस न मिल पाने के कारण वह परेशान थे। 
मूलरूप से अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के रहने वाले एसीपी प्रेम बल्लभ शर्मा की तबियत पिछले काफी समय से खराब चल रही थी। उन्हें हाथ-पैर में कंपन की शिकायत थी, जिसका इलाज जीटीबी अस्पताल में चल रहा था। जब वह स्पेशल सीपी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे थे, तभी उन्होंने पुलिस महकमे से वीआरएस लेने की इच्छा जाहिर की थी। इसके लिए समय से पहले रिटायरमेंट को लेकर पत्र भी लिखा गया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। पुलिस अफसरों ने उन्हें महकमे में ही अपनी सेवाएं जारी रखने की सलाह दी थी। इलाज के सिलसिले में वह 28 दिन अस्पताल में भर्ती भी रहे और कुछ दिनों पहले ही उन्होंने ऑफिस आना शुरू किया था। 
काबिलियत के दम पर हेडकॉन्स्टेबल से एसीपी, मिला था पुलिस मेडल 
पुलिस के मुताबिक एसीपी प्रेम बल्लभ शर्मा परिवार के साथ गली नंबर-2, विजय पार्क, मौजपुर में रहते थे। परिवार में मां धर्मा देवी, दो छोटे भाई कमलापति शर्मा उर्फ कमल, हरीश शर्मा, पत्नी दीपा शर्मा के अलावा तीन बेटे राहुल (26), कपिल (24) और रोहित (22) है। 1986 में दिल्ली पुलिस में बतौर हवलदार भर्ती हुए प्रेम बल्लभ 2006 में इंस्पेक्टर के लिए प्रमोट हो गए थे। इसके बाद 2016 में इन्हें प्रमोट कर एसीपी बना दिया गया था। फिलहाल इनकी तैनाती पुलिस मुख्यालय में थी। शुरुआती पोस्टिंग में वह एएसआई स्टेनो भी रहे। अपने कार्यकाल में बेहतरीन कार्य को देखते हुए उन्हें काफी बार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। पीएम सिक्यॉरिटी में भी रहे। पुलिस महकमे में सराहनीय सेवा के लिए उन्हें 2016 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस मेडल देकर भी सम्मानित किया गया। उस वक्त वह इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थे। एसीपी के छोटे भाई हरीश के मुताबिक, परिवार में कुछ भी क्लेश नहीं था जो वह ऐसा कदम उठाते। तीनों भाई संयुक्त परिवार में रहते हैं। भाई की मौत की खबर सुबह साढ़े दस बजे पता चली थी। 

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