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8 Nov 2018

आदमखोर बाघिन को मरने मे नियमों का उल्लंघन करने पर घिरा वन विभाग : महाराष्ट्र

नागपुर। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में आदमखोर बाघिन 'अवनि' को करीब एक साल चली लंबी खींचतान और खोज अभियान के बाद शुक्रवार रात मार गिराया गया। इस नरभक्षी बाघिन टी 1 पर पांढरकवडा क्षेत्र में 13 से ज्यादा लोगों को शिकार बनाने का आरोप है। उधर, नरभक्षी बाघिन के खत्म होने पर इलाके में जश्न का माहौल है लेकिन इस हत्या पर वन विभाग खुद आरोपों से घिर गया है। बताया जा रहा है कि नियमों को ताक पर रखकर बाघिन की हत्या की गई है। फिलहाल मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है।दरअसल, शुक्रवार देर रात करीब 11 बजे टी1 बाघिन को हैदराबाद के शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान के बेटे असगर (35) ने मार गिराया। आरोप है कि इस दौरान असगर ने बाघिन को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की कोशिश तक नहीं की। जबकि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से बाघिन को पहले ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की कोशिश करने को कहा गया था। कोर्ट की ओर से इसमें सफलता न मिलने पर ही बाघिन के खिलाफ जानलेवा कदम उठाने को कहा गया था। यही नहीं, आरोप यह भी हैं कि असगर को बाघिन को मारने की इजाजत भी नहीं थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) एके मिश्रा की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक असगर के पिता शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान और वन्य जीव पशुचिकित्सक एम नवीन कुमार को बाघिन को मारने की इजाजत दी गई थी। पर, असगर के साथ मौके पर ये दोनों ही मौजूद नहीं थे।उधर, यवतलाम के मुख्य वन संरक्षक पीजी राहुरकर का दावा है कि असगर ने पहले डार्ट (बेहोश करने का इंजेक्शन) का प्रयोग किया। पर, बाद में बाघिन द्वारा उनकी टीम (ओपन जिप्सी में सवार) पर हमला बोल देने पर बचाव में उन्होंने उसे मार गिराया। हालांकि राहुरकर इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि बाघिन को रात में ट्रैंक्विलाइज करने की कोशिश क्यों की गई जबकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नियमों के यह खिलाफ है।वन्यजीव कार्यकर्ता जेरिल ए. बनाइत कहते हैं, 'इस तरह के ऑपरेशन केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच में ही चलाए जा सकते हैं।' उधर, मुख्य वन संरक्षक ने साफ किया कि टीम के साथ कोई पशुचिकित्सक या वन विभाग का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, बाघिन के शरीर में एक डार्ट (बेहोश करने का इंजेक्शन) जरूर लगा दिखा, लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसे बाद में हाथ से चुभाया गया हो। यही वजह है कि यह माना जा रहा है कि ट्रैंक्विलाइज करने से पहले बाघिन को मारा गया है। 
'आत्मरक्षा में बाघिन को मार गिराया' 
उधर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) एके मिश्रा कहते हैं, कुछ लोगों ने टी 1 बाघिन को देखकर इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद असगर के नेतृत्व में एक टीम को वहां भेजा गया। टीम के एक सदस्य ने डार्ट (बेहोश करने का इंजेक्शन)की कोशिश की तो बाघिन ने टीम पर हमला बोल दिया। टीम को खुद को बचाने के लिए असगर ने करीब 8-10 मीटर की दूरी से बाघिन को मार गिराया। 
'सच के लिए फरेंसिक जांच जरूरी' 
उधर, आरोपों से घिरे विभाग ने फिलहाल इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं। उधर, कर्नाटक के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ प्रयाग एचएस कहते हैं, 'इस मामले में वन विभाग ने खुद के साथ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के नियमों का साफ तौर पर उल्लंघन किया है। फरेंसिक रिपोर्ट के जरिए ही सच्चाई सामने आ सकती है।' 

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