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29 Nov 2018

दुनिया भारत को विशिष्ट ताकत के तौर पर देखती है: राष्ट्रपति

गुवाहाटी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया भारत को एक विशिष्ट ताकत के तौर पर देखती है उससे उम्मीद करती है कि वह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, कारोबार एवं वाणिज्य के संदर्भ में वैश्विक प्रतिमान को स्वरूप प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाये। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हाल में वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा से लौटा हूं। मैंने इन देशों के नेताओं के साथ पारस्परिक हितों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की...। विचार-विमर्श में यह बात स्पष्ट रूप निकलकर सामने आयी कि विश्व भारत को आज अलग नजरिये से देखता है।’’कोविंद ने कहा, ‘‘भारत को एक मुख्य शक्ति के तौर पर देखा जाता है और भारत से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार, वाणिज्य और पर्यावरण संरक्षण के संबंध में वैश्विक प्रतिमानों को स्वरूप प्रदान करने के लिये प्रमुख भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है। अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भारत के उदय के अनेक आयाम हैं जो उसे हमारी सेना की क्षमताओं और बहादुरी से प्राप्त होते हैं।’’ उन्होंने कहा कि भारत शांति के लिये दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और अपनी संप्रभुता के संरक्षण के लिये पूरी ताकत झोंकने को दृढ़ संकल्पित है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब जरूरत पड़ी हमारे बहादुर सैनिकों और महिला सैन्यकर्मियों ने यह सुनिश्चित किया है कि राष्ट्र इन सुरक्षा चुनौतियों को मजबूती और प्रभावी ढंग से निपटा सके।’’राष्ट्रपति ने यहां असम में 118 हेलीकॉप्टर यूनिट को ‘स्टैंडर्ड्स’ तथा एयर डिफेंस कॉलेज को ‘कलर्स’ प्रदान किये। कोविंद ने कहा कि दोनों ईकाइयों का पेशेवर उत्कृष्टता का शानदार इतिहास रहा है और उन्होंने उसी गौरव के साथ अपनी जिम्मेदारी निभायी। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उनकी नि:स्वार्थ सेवा, पेशेवर रुख और साहस के लिये राष्ट्र आज उन्हें नमन करता है।उन्होंने कहा, ‘‘यूनिट ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और राहत अभियानों में भी योगदान दिया है। यूनिट का आदर्श वाक्य ‘आपत्सु मित्रम’ है, जिसका अर्थ है ‘संकट का साथी’। यह आदर्श वाक्य यूनिट के लिये बिल्कुल उपयुक्त है।’’ कोविंद ने कहा कि एयर डिफेंस कॉलेज ने पिछले 60 साल में प्रशिक्षण में अहम मुकाम हासिल किया है।कॉलेज ना सिर्फ भारतीय वायुसेना के अधिकारियों बल्कि मित्र देशों के अधिकारियों को भी पेशेवर प्रशिक्षण देता है।

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