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29 Nov 2018

नेताओं के इशारे पर ट्रांसफर करना शक्तियों का दुरुपयोग: हाई कोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजनैतिक दबाव में कर्मठ और ईमानदारी से काम करने वाली अधिकारी के दस साल में 11 बार और पिछले महज ढाई साल में छह बार तबादला करने को शक्तियों का दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण माना है। इसके साथ ही कोर्ट ने नगरपालिका परिषद गढ़मुक्तेश्वर हापुड़ की अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण के ट्रांसफर का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने राजनैतिक दबाव में बार-बार तबादला करके याची को परेशान करने के लिए निदेशक स्थानीय निकाय पर पचास हजार रुपये हर्जाना लगाया है और हर्जाना राशि का भुगतान दो महीने में याची को किए जाने का निर्देश दिया है।यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस नीरज त्रिपाठी की खण्डपीठ ने तबादले को चुनौती देने वाली अमिता वरुण की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मालूम हो कि विशेष सचिव ने निदेशक को मंत्री की इच्छा का पालन करते हुए याची का तबादला करने का आदेश दिया। जिस पर यह तबादला कर दिया गया। कोर्ट ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'निदेशक नियुक्ति अधिकारी होने के नाते स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं लेकिन राजनैतिक आकाओं के इशारे पर काम करने की ब्यूरोक्रेसी की प्रवृत्ति के कारण एक कर्तव्यनिष्ठ ईमानदार अधिकारी को परेशान किया जा रहा है। उसे राजनैतिक आकाओं के इशारे पर काम करने को विवश करने का प्रयास किया गया। याची के खिलाफ भ्रष्टाचार की कोई शिकायत नहीं है और न ही उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है।' 
कोर्ट ने यह भी कहा, 'एक बोल्ड लेडी अधिकारी को इसलिए बार-बार स्थानांतरित किया जा रहा है कि वह राजनैतिक लोगों की इच्छा के विपरीत कानून के तहत कार्य कर रही हैं। बार-बार तबादला ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी को हतोत्साहित करने वाला कदम है। अधिकारियों ने नेताओं की इच्छा के आगे समर्पण कर दिया है। कानूनन उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने का पूरा अधिकार है लेकिन इसकी अनदेखी कर निर्देशों का पालन करते जा रहे हैं।' कोर्ट ने यह भी कहा, 'वैसे तबादला सेवा का एक हिस्सा है लेकिन यह जनहित या प्रशासनिक हित में किया गया होना चाहिए। नेताओं के इशारे पर अधिकारी का बार-बार तबादला जनहित में न होकर दुर्भावनापूर्ण और दण्डात्मक तबादला है। बिना किसी आरोप और कारण के किसी का दंड स्वरूप तबादला कानून के विपरीत है।' 

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