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28 Nov 2018

जंतर-मंतर पर अधिकतम 1,000 लोगों को प्रदर्शन की अनुमति : दिल्ली पुलिस

नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस के दिशानिर्देशों के अनुसार अगर जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 1,000 के पार पहुंच जाती है तो उन्हें रामलीला मैदान जाना पड़ेगा, जहां 50,000 लोग एकत्र हो सकते हैं।इन दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ऑल इंडिया किसान संघर्ष समिति कोऑर्डिनेशन कमेटी (एआईकेएससीसी) के साथ बातचीत कर रही है जो 30 नवंबर को संसद की ओर मार्च करेगी। पुलिस ने कहा कि वे प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में रोकेंगे, क्योंकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 30,000 होने का अनुमान है। आदेश के अनुसार जंतर मंतर पर सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच ही प्रदर्शन किये जा सकेंगे। इससे पहले जंतर मंतर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करने वाले समूहों का एक केन्द्र था। दिशा-निर्देश प्रदर्शनकारियों को ‘‘एक निश्चित अवधि के लिये’’ भी तंबू लगाने या अस्थायी ढांचा खड़ा करने से रोकते हैं।आदेश के अनुसार, ‘‘दिन में कई प्रदर्शनों की अनुमति दी जा सकती है जो समय एवं उपयुक्त समय अंतराल की उपलब्धता पर निर्भर करेंगे। हालांकि इस दौरान भी प्रदर्शनकारियों की संख्या 1,000 तक सीमित करने के निर्देश का पालन करना होगा।’’ कोई भी आयोजक अगर बिना किसी हलफनामे के 1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को लाता है तो इसे ‘‘जानबूझकर उच्चतम न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का प्रयास’’समझा जायेगा।आदेश के अनुसार प्रदर्शनकारियों की अधिकतम 25 बसों को नयी दिल्ली जिला के अधिकार क्षेत्र में आने की अनुमति होगी और इन वाहनों को जय सिंह रोड या यातायात पुलिस के परामर्श से किसी अन्य जगह पर खड़ा करने की अनुमति होगी।आदेश के अनुसार, ‘‘किसी भी ट्रैक्टर, ट्रॉली, बैलगाड़ी, साइकिल-रिक्शा या हाथगाड़ी की अनुमति नहीं होगी। घोड़ा, हाथी, ऊंट मवेशियों को भी रैली या धरना में लाने की इजाजत नहीं होगी।’’ इसके अनुसार पुलिस उपायुक्त (नयी दिल्ली) से विशेष अनुमति के बिना जंतर मंतर पर रैली या धरना स्थल पर किसी लाउडस्पीकर या जनता को संबोधित करने की प्रणाली का इस्तेमाल नहीं होगा। आदेश में प्रदर्शनस्थलों पर लाठियों, पटाखों, भालों, तलवारों या अन्य हथियारों को लाने पर प्रतिबंध है। साथ ही पुतले या दस्तावेजों को जलाने, खाना पकाने, कचरा फैलाने पर प्रतिबंध है। 23 जुलाई को उच्चतम न्यायालय ने जंतर मंतर और बोट क्लब जैसी जगहों पर रैलियों, धरना या प्रदर्शन पर लगा पूर्ण प्रतिबंध हटा दिया था और कहा था कि ऐसी जगहों में विरोध प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

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