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9 Oct 2018

आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर्स को उच्चतम न्यायालय ने हिरासत में लेने का दिया आदेश : राष्ट्रीय


नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आम्रपाली समूह के तीन निदेशकों को मंगलवार के पुलिस की हिरासत में सौंपते हुये कहा कि यह कंपनी शीर्ष अदालत के साथ ‘लुका छिपी’ खेल रही है और फारेंसिंक आडिट के लिये सारे दस्तावेज सौंपने के उसके आदेशों का पालन नहीं कर रही है।न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने कहा कि न्यायालय में मौजूद आम्रपाली समूह के निदेशकों-अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिय और अजय कुमार समूह की 46 कंपनियों के सारे दस्तावेज सौंपे जाने तक पुलिस हिरासत में रहेंगे। पीठ ने आम्रपाली समूह के इस आचरण पर नाराजगी व्यक्त करते हुये सवाल किया, ‘‘यह सब क्या हो रहा है? यह लुका छिपी का खेल और इस न्यायालय के आदेशों का घोर उल्लंघन क्यों हो रहा है?’’ पीठ ने समूह के वकील से कहा, ‘‘आप न्यायलय की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।’’ आम्रपाली समूह का फारेंसिक आडिट करने के लिये न्यायालय द्वारा नियुक्त आडिटर-रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल- ने कहा कि उन्हें अभी तक सारे दस्तावेज नहीं मिले हैं। पीठ ने कहा कि यह उसके आदेशों का घोर उल्लंघन हैं। न्यायालय आम्रपाली की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में मकान बुक कराने वाले खरीदारों ने करीब 42,000 फ्लैट के कब्जे के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।समूह के वकील ने जब यह कहा कि उन्होंने वे सारे दस्तावेज आडिटर को उपलब्ध करा दिये है जो उन्होंने मांगे थे, इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आप फिर न्यायालस से झूठ बोल रहे हैं। जब वे (आडिटर) कह रहे हैं कि उन्हें दस्तावेज नहीं मिले, आप पहले व्यक्ति होने चाहिए जिसे न्यायालय के आदेश के अनुरूप दस्तावेज उन्हें सौंप देने चाहिए।’’
पीठ ने यह भी जानना चाहा कि समूह ने अभी तक कंपनियों की लेखा पुस्तिकाएं आडिटरों को क्यों नहीं सौंपे हैं।पीठ ने कहा, ‘‘मकान खरीदार कह रहे हैं कि उनका पैसा कहीं और खर्च किया गया है। बही खातों से आसानी से इसका पता लगाया जा सकता है। फिलहाल किसी को नहीं मालूम की पैसा कहां गया। निश्चित ही आप खातों के साथ लुका छिपी खेल रहे हैं। इसकी मंशा ही कानून की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की की है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इसमें मंशा एकदम साफ है। आप कुछ न कुछ करने के इरादे से समय निकाल रहे हैं। आप यह जानबूझकर कर रहे हैं। हर बार आप यही कर रहे हैं।’’।समूह के वकील ने अब दस्तावेज सौंपने के लिये न्यायालय से एक अंतिम अवसर देने का आग्रह किया तो पीठ ने कहा, ‘‘हमने आपको पर्याप्त समय दिया है। हमने अपने आदेशों पर उनसे अमल कराने के लिये कोई भी कसर नहीं छोड़ी है।’’शीर्ष अदालत ने कहा कि समूह की लेखा पुस्तकों को आंतरिक और सांविधिक आडिटर ने 2015 तक अंतिम रूप दिया था और निश्चित ही इसके बाद की लेखा पुस्तकों का रिकार्ड नहीं है।पीठ ने कहा कि दोनों आडिटर के अनुसार न्यायालय के आदेश के बावजूद समूह की 46 कंपनियों में से सिर्फ दो-आम्रपाली जोडिएक और आम्रपाली प्रिंसली इस्टेट-के दस्तावेज ही उन्हें सौंपे गये हैं। ।पीठ ने इसके साथ ही इन सभी कंपनियों और इनके निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ क्यों नहीं अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाये।पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हम, इसलिए, दिल्ली पुलिस और नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा पुलिस को इस न्यायालय के आदेश के अनुरूप सभी प्रासंगिक दस्तवेज जब्त करने और उन्हें फारेंसिक आडिटर को सौंपने के निर्देश देते हैं। कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल द्वारा आम्रपाली मामले में मांगे गये दस्तावेज भी जब्त किये जायें।’’
न्यायालय ने कहा कि यदि दस्तावेज बहुत मोटे हों तो उन्हें एक कमरे में रखकर उसकी चाबियां फारेंसिक आडिटर को सौंपी जाये।पीठ ने इस मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर के लिये सूचीबद्ध करते हुये कहा, ‘‘हम उन्हें (निदेशकों) को गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं। यह सामान्य गिरफ्तारी नहीं है। यदि आप गरिमा के साथ जीना चाहते हैं तो तत्काल सारे दस्तावेज सौंप दें।

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