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11 Oct 2018

कविनगर थाने में तैनात एक दरोगा ने खुद को मारी गोली, मौत : गाजियाबाद


गाजियाबाद। गाजियाबाद के कविनगर थाने में तैनात एक दरोगा ने नाइट ड्यूटी से आकर बुधवार सुबह अपने स्टाफ क्वॉर्टर में सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। दरोगा को गंभीर हालत में पास के अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि मृतक दरोगा का नाम विजय कुमार था। वह करीब एक साल से कविनगर थाने में तैनात था। विजय ने खुद को गोली क्यों मारी, फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है।एसएसपी ने बताया कि इसी साल अप्रैल महीने में विजय समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट और फायरिंग करने का मुकदमा मथुरा के थाने में दर्ज हुआ था। इस मामले की अभी जांच चल रही है। हालांकि जांच में विजय का दोष साबित नहीं हुआ। ऐसे में जल्द ही यह मामला खत्म होने वाला था। खुदकुशी के पीछे क्या वजह हो सकती है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। विजय के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार को सौंप दिया गया जिसके बाद परिवार के लोग उसे अंतिम संस्कार के लिए मथुरा लेकर गए हैं।जानकारी के अनुसार, मूलरूप से अलीगढ़ के रहने वाले विजय कुमार 1994 में पुलिस विभाग में बतौर कॉन्स्टेबल भर्ती हुए थे। 2016 में प्रमोशन के बाद वह सब-इंस्पेक्टर बने थे। बीते एक साल से वह कविनगर थाने में तैनात थे। विजय लोहामंडी और राजनगर सेक्टर-9 चौकी के इन्चार्ज भी रह चुके थे। बीते कुछ समय से उसकी ड्यूटी कविनगर थाने में लगी थी। मंगलवार रात को नाइट ड्यूटी के दौरान विजय ने थाना प्रभारी को बताया था कि उन्हें घबराहट हो रही है और काफी पसीना भी आ रहा है जिसके बाद थाना प्रभारी ने रात करीब 9 बजे उनसे बात की और उन्हें समझाया था। इसके बाद विजय नाइट ड्यूटी पर चले गए। सुबह करीब 4 बजे ड्यूटी पूरी होने के बाद वह कविनगर थाने में स्टॉफ क्वॉर्टर में पहुंचे जहां उनके रूममेट और थाने का मुंशी सैयद इमाम अख्तर जैदी सो रहे थे। जानकारी के मुताबिक, विजय करीब 4 बजे ड्यूटी से लौटे थे और उन्होंने 6:30 बजे के आसपास खुद को सिर में गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर उठे जैदी ने शोर मचाकर साथियों को बुलाया जिसके बाद विजय को अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई। 
ड्यूटी को लेकर दबाव नहीं, फिर क्यों मारी गोली 
सब-इंस्पेक्टर विजय के खुद को गोली मारने की घटना से थाने के सभी पुलिसकर्मी हैरान हैं। थाने में हमेशा खुश और मजाकिया मूड में रहने वाले विजय का तकिया कलाम था, 'दिक्कत कहां आ रही है'। ऐसे में उसके खुदकुशी करने की वजह किसी को समझ में नहीं आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन्हें किस तरह की दिक्कत आई थी, जिसके चलते उन्होंने ऐसा कदम उठा लिया। मथुरा में दर्ज हुए मामले में विजय 7 अक्टूबर को मथुरा पुलिस से मिलकर आए थे जहां उन्हें मामले में राहत मिल रही थी। थाना प्रभारी ने बताया कि विजय 3 अक्टूबर को ही छुट्टी से लौटे थे। थाना प्रभारी ने बताया कि रविवार को मथुरा से लौटने के दौरान वहां से मिठाई लेकर आए थे। उन्होंने बुधवार को एसएसपी ऑफिस में भी मिठाई लेकर जाने की बात कही थी।

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