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9 Oct 2018

गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही पर पांच पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई : मध्यप्रदेश


भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गत वर्ष 31 अक्टूबर को कोचिंग से घर लौट रही 19 वर्षीय छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किये गये पांच पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पुलिस विभाग ने मंगलवार को कड़ी कार्रवाई की है। इनमें से दो उप निरीक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया गया है।भोपाल पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया, ‘‘इस मामले में निलंबित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच अधिकारी पुलिस अधीक्षक (भोपाल उत्तर) की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस महानिरीक्षक भोपाल जयदीप प्रसाद द्वारा दो उप निरीक्षकों भवानी प्रसाद उइके और रामनाथ तिरकाम को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय किया गया है। इसके अलावा इस मामले में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक एमपी नगर थाना संजय सिंह बैस की एक वेतनवृद्धि और हबीबगंज थाना प्रभारी रविन्द्र यादव की दो वेतनवृद्धि में कमी करने का फैसला लिया गया है जबकि जीआरपी हबीबगंज थाना प्रभारी मोहित सक्सेना को निरीक्षक के न्यूनतम वेतन पर लाने का निर्णय लिया गया है।’’ गौरतलब है कि 31 अक्टूबर को कोचिंग से घर लौट रही 19 वर्षीय छात्रा के साथ चार बदमाशों ने गैंगरेप किया था। इसके बाद पीड़िता को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए हबीबगंज, एमपी नगर और जीआरपी थानों के बीच लगभग 24 घंटों तक भटकना पड़ा था, जबकि पीड़िता के माता-पिता भी पुलिसकर्मी हैं। किसी पुलिस स्टेशन में इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही थी।इस मामले में पुलिस की तरफ से हुई लापरवाही के बाद घिरी प्रदेश सरकार ने डिप्टी एसपी को हटा दिया था तथा तीन थाना प्रभारी और दो उप निरीक्षकों को भी निलंबित किया गया था। निलंबित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की जांच का जिम्मा पुलिस अधीक्षक भोपाल (उत्तर) को सौंपा गया। भोपाल की स्थानीय अदालत द्वारा छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार करने के चारों आरोपियों को 23 दिसंबर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया।

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