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5 Oct 2018

गीता भवन में 70 साल पहले 60 रुपये में होती थी रामलीला : गुड़गांव


गुड़गांव। शहर में रामलीला का मंचन कलाकारों के कठिन परिश्रम का नतीजा होता है। इन दिनों वे पूरी तरह फलाहार पर रहते हैं और जमीन पर सोते हैं। इतना ही नहीं इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन भी किया जाता है। तब से अब तक बदलते दौर में कहानी की मौलिकता को जीवंत रखना सबसे बड़ी चुनौती है।गीता भवन स्थित श्री सनातन धर्म सभी रामलीला कमिटी की शुरुआत 1948 में हुई। पंजाब फिरोजपुर से आए कई परिवार के लोगों ने मिलकर इसकी शुरुआत की। केंद्रीय श्री सनातन धर्म रामलीला के अध्यक्ष सुरेंद्र खुल्लर बताते हैं कि उनके पिता मुल्कराज खुल्लर समेत, छज्जूराम लुधरा, पंडित द्वारका प्रसाद, सुंदरराम शर्मा ने मिलकर इस कमिटी की शुरुआत की थी। उस समय यह रामलीला उर्दू में लिखी गई थी, लेकिन बाद में इसका अनुवाद हिंदी में किया गया, ताकि सभी को समझने में आसानी हो। 
गीता भवन स्थित श्री सनातन धर्म सभी रामलीला कमिटी में तब राम का किरदार फकीरचंद, लक्ष्मण का किरदार नरेंद्र चौधरी, सीता का रोल कमल सहानी, रावण का किरदार हंसराज और हनुमान का किरदार रामलाल शर्मा ने अदा किया था। उस वक्त 60 रुपये में पहली रामलीला का मंचन हुआ था। अब तो 8 से 10 लाख रुपये में रामलीला होती है। सुरेंद्र खुल्लर ने बताया कि उस समय उनके पिता समेत अन्य लोग इतनी निष्ठा के साथ रामलीला का मंचन किया करते थे की 9 दिनों तक केवल फल आहार से रहते थे। इतना ही नहीं 9 दिन तक लगातार जमीन में सोते थे और ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। 

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