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24 Oct 2018

स्टैचू ऑफ यूनिटी पर अब तक कुल 2131 करोड़ खर्च, करीब 3 हजार करोड़ तक पहुंचेगी लागत : गुजरात

अहमदाबाद। गुजरात के गांधीनगर जिले में बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे स्टैचू ऑफ यूनिटी की कुल लागत करीब 3 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इसी साल 31 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने वाले हैं और अब तक इस पर कुल 2100 करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। इसके अलावा अनुमानित रूप से अभी इसपर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च और किया जाना है।उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, स्टैचू ऑफ यूनिटी के निर्माण पर गुजरात और केंद्र सरकार की ओर से अब तक कुल 2131.45 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है और अनुमानित रूप से आने वाले वक्त में इसपर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च और किया जाना है। ऐसे में निर्माण की कुल लागत करीब 2400 करोड़ के आसपास पहुंच सकती है।दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ यूनिटी' अब बनकर लगभग तैयार है। 182 मीटर ऊंची इस विशाल प्रतिमा का अनावरण 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह प्रतिमा भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की है। बता दें कि 31 अक्टूबर को सरदार पटेल का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि यह प्रतिमा देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। आइए जानते हैं क्या है इस प्रतिमा की खूबियां-
इस प्रतिमा को 2,989 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। 182 मीटर की ऊंचाई के पीछे अवधारणा गुजरात विधानसभा में सीटों की कुल संख्या से है। इस प्रतिमा को 4076 मजदूरों ने मिलकर बनाया है। इसमें 200 चीनी श्रमिक भी शामिल थे।प्रतिमा परिसर में एक प्रदर्शनी मंजिल, एक मेमोरियल गार्डन और एक बड़ा संग्रहालय है। संग्रहालय में सरदार पटेल की जिंदगी से जुड़ी कई चीजों को सहेजा गया है। इनमें उनके करसमद में जन्म से लेकर लौहपुरुष बनने तक की यात्रा, व्यक्तिगत जिंदगी और गुजरात से उनके जुड़ाव को देखा जा सकता है।यह प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ लिबर्टी' की ऊंचाई से दोगुनी और रियो डी जनेरो में 'क्राइस्ट द रिडीमर' से चार गुनी होगी। न्यू यॉर्क शहर की पहचान 'स्टैचू ऑफ लिबर्टी' की ऊंचाई 93 मीटर है, जबकि रियो डी जेनेरो की 'क्राइस्ट द रिडीमर' प्रतिमा 38 मीटर ऊंची है।साल 2014 में गुजरात सरकार ने कंस्ट्रक्शन का ठेका एक मल्टी-फर्म कंसोर्टियम को सौंप दिया था। इस कंसोर्टियम में माइकल ग्रेव्स आर्किटेक्चर ऐंड डिजाइन और टर्नर कंस्ट्रक्शन, जो इससे पहले दुनिया की सबसे ऊंची इमारत 'बुर्ज खलीफा' बना चुकी है, शामिल हैं।
इस बीच सरदार पटेल की इस प्रतिमा को 'मेड इन चाइना' बताकर विपक्ष केंद्र सरकार को घेरने में भी जुटा है। हालांकि निर्माण से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक चीनी फर्म ने सिर्फ इसके आवरण को तैयार करने का काम किया है जो कि ब्रॉन्ज शीट (कांस्य) से बना है।इस स्टैचू का आइडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तब आया था, जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 6 अक्टूबर 2010 को मोदी ने घोषणा की थी कि गुजरात के 50 साल पूरे होने पर इस प्रतिमा का निर्माण नर्मदा नदी में सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट पहाड़ी पर किया जाएगा।इसके कंस्ट्रक्शन को चार स्टेज में बांटकर काम किया गया, जिनमें मॉक-अप, 3डी स्कैनिंग टेक्निक के साथ ही कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल प्रॉडक्शन टेक्निक, स्पाइनल स्ट्रक्चर शामिल है। स्टैचू का मूल ढांचा कंक्रीट और स्टील से बनाया गया, स्टैचू के अंदर दीवारें, मचान और चार दूसरी साइट्स (वॉक-वे, टिकट काउंटर, फूड कोर्ट, चार लेन का हाइवे, एक यार्ड जहां स्टैचू से जुड़े सभी हिस्से को जोड़ा गया और श्रेष्ठ भारत भवन, जो कि 52 कमरों की थ्री-स्टार रिहायश है, भी डिवेलप किया गया।अब मूर्ति लगभग पूरी हो चुकी है और इसका लोकार्पण 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर किया जाएगा। चूंकि, यह दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ती होगी तो इसे देखने के लिए भी देश-विदेश से लोग आएंगे। इससे गुजरात के पर्यटन उद्योग के बढ़ने की पूरी संभावना है।अभी गुजरात का पर्यटन उद्योग 17 प्रतिशत प्रति साल के दर से बढ़ रहा है। बता दें कि गुजरात में पर्यटक अहमदाबाद के अलावा सोमनाथ, द्वारका, गिर जंगल देखने भी पहुंचते हैं। इन दिनों गुजरात के सीएम विजय रूपाणी और डेप्युटी सीएम नितिन पटेल प्रतिमा को दिए जा रहे फाइनल टच पर नजर बनाए हुए हैं।इसके अलावा गुजरात सरकार की ओर से कार्यदायी एजेंसी को 15 साल तक स्टैचू के रख-रखाव के लिए करीब 600 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस तरह अगर यह राशि भी जोड़ दी जाए तो स्टैचू ऑफ यूनिटी की कुल लागत करीब 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। 
अब तक 2131 करोड़ रुपये खर्च 
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब तक खर्च हुए कुल 2131.45 करोड़ रुपये में से केंद्र सरकार द्वारा 300 करोड़, राज्य सरकार के अनुदान से 554 करोड़ और केंद्र व राज्य सरकार की पीएसयू कंपनियों से सीएसआर के माध्यम से करीब 455 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा 102 करोड़ रुपये विभिन्न दानदाताओं और 36 लाख रुपये ऑनलाइन डोनेशन के जरिए मिले हैं। इस तरह करीब 1412.27 करोड़ रुपये की आय के सापेक्ष 22 अक्टूबर 2018 तक 2131.45 करोड़ रुपये का खर्च किया जा चुका है। 
31 अक्टूबर को पीएम मोदी करेंगे अनावरण 
बता दें कि सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्‍टैचू ऑफ यूनिटी’ को अंतिम रूप देने का काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को इसका अनावरण करेंगे। नर्मदा नदी के पास साधु बेट द्वीप पर स्थित प्रतिमा के लिए लगातार करीब 3400 मजदूर और 250 इंजिनियर काम कर रहे हैं। यह प्रतिमा 'स्टैचू ऑफ लिबर्टी' की ऊंचाई से दोगुनी और रियो डी जनेरो में 'क्राइस्ट द रिडीमर' से चार गुनी होगी। 31 अक्टूबर को अनावरण कार्यक्रम के पहले ही प्रतिमा निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा। एक अधिकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए पूरी रफ्तार से काम चल रहा है। इसमें सरदार पटेल का एक संग्रहालय, एलिवेटर्स, दीर्घा तैयार करना है। स्मृति उद्यान को विकसित करने का कार्य भी अंतिम चरण में है। 

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