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26 Sep 2018

अपनी बदहाली पर आंसू बहाती ऐतिहासिक झील : फतेहपुर


अमित कुमार सिंह,(फतेहपुर)। अगर हम इतिहास की बात करे तो इस जनपद ने अंग्रेजो के दौर से लेकर आज तक किसी न किसी रूप में इतिहासिक सुर्खियों में अपनी जगह जरूर बनाई हैं। आज हम आप को इस पिछड़े जनपद की ऐसी झील के बारे में बताने और दिखाने जा रहे हैं। जिस झील ने आठ किलो मीटर के दायरे में अपनी पहचान बना राखी हैं। इस झील में विदेशी पंक्षी आकर बसेरा करते थे जो की यहां का आकर्षण का केंद्र होता था। लोग दूर दूर से इस झील को देखने आते थे। मगर आज यह अपनी पहचान खोती जा रही हैं। फतेहपुर जिले के फर्शी गाँव में स्थिति हैं। उत्तर प्रदेश फतेहपुर जिले के हुसैन गंज थाना क्षेत्र के फ़रसी गाँव में जहा पर आठ किलो मीटर के दायरे में यह झील हैं। इस झील में कभी विदेशी पंक्षी निवास करते थे। इस झील और विदेशी पंक्षियों को जनपद और गैर जनपद के देखने वालो का ताता लगा रहता था। मगर आज यह अपनी पहचान धीरे धीरे खोती जा रही हैं। आज इस झील में अनदेखी के चलते पानी के ऊपर जल कुम्भी बड़ी मात्रा में देदेखी  जा सकती हैं। जल कुम्भी ने अपनी जड़े पूरी झील में फैला रखी हैं। अब न ही लोग यहां पर आते हैं और न ही विदेशी पंक्षी। जब की इस झील का इतिहास ससुर खदेरी  नदी से जोड़ कर बताया जाता हैं जो की अपने आप खुद इतिहास हैं पहचान की जरुरत नहीं। इस बारे में जब वहा के प्रधान से बात की गयी तो उन्होंने बताया की हमने भी सर्वे किया यह गूगल में या नक़्शे में हमे यह झील कही नहीं दिखाई दी।
 यहां बड़े बड़े अधिकारी आये यहां तक की प्रदेश सरकार से भी यहां का पानी और मिटटी ले गए। यह बार बार बताते रहे की इसका सुंदरी कारण होगा पंक्षी बिहार बन रहा हैं मगर आज तक यहां कोई काम नहीं हुआ।  सर्वे में आठ किलो मीटर यह झील हैं। जब की जिले की सब से बड़ी झील हैं। अगर इसका विस्तार हो जाय सुंदरी कारण हो जाय तो यह पर्यटन स्थल बन सकता हैं। यहां पर हर तरह के विदेशी पंक्षी आते थे। मगर  यहां पर दो नाले बना दिए गए हैं इसका पानी गंगा में चला जाता हैं जिसकी कारण यहाँ चिड़िया नहीं आती। प्रधान ने यह भी बताया की अधिकारियों ने बताया की इसका पैसा पास हो गया हैं। बल्कि हमारे यहां के स्वामी विज्ञानंद महाराज यहां पर आये उनके साथ हम लोग छे सात किलोमीटर पैदल भी चले उन्होंने बताया की यह ससुर खदेरी  नदी की उत्तम स्थली हैं और इसका विकास होना जरुरी हैं।

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