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5 Sep 2018

सवर्ण संगठनों के 'भारत बंद' ने उड़ाई सरकार की नींद : मध्य प्रदेश


भोपाल। सवर्ण संगठनों द्वारा गुरुवार को आहूत 'भारत बंद' ने मध्य प्रदेश सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। एक ओर जहां बंद को अलग-अलग संगठनों का बिना मांगे समर्थन मिल रहा है वहीं दूसरी ओर पुलिस हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है। बन्द समर्थकों पर मानसिक दबाव बनाने के लिये सभी जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है। ग्वालियर संभाग के जिलों में पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया है।भोपाल में पुलिस मुख्यालय से बताया गया है कि बन्द के मद्देनजर सभी जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गये हैं। अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। चूंकि बन्द की अपील सोशल मीडिया में आई है, इसका कोई नेता नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। सभी पुलिस अधीक्षकों से कहा गया है कि वे अपने इलाके के उन संगठनों से बात करें जो बन्द का समर्थन कर रहे हैं।इस बीच बन्द को स्वतः स्फूर्त समर्थन भी मिल रहा है। प्रदेश के पेट्रोल पंप मालिकों ने बन्द के मद्देनजर अपने पम्प बन्द रखने की घोषणा की है। बड़ी मंडियों को भी बंद रखने की बात कही गई है। बाजार बंद रखने की अपील बन्द समर्थक करीब 120 संगठनों की ओर से की गई है। बता दें कि मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट में बदलाव के विरोध में हो रहे इस आंदोलन से 100 से ज्यादा संगठन जुड़े हैं। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ लड़ रहे सरकारी कर्मचारियों के संगठन ने बन्द का समर्थन किया है, लेकिन वह बन्द में शामिल नहीं है। संगठन से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार ललित शास्त्री का कहना है कि हम हर उस कानून का विरोध करते हैं जो पक्षपाती है। इसका विरोध करने वालों का हम समर्थन करते हैं, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा के हम खिलाफ हैं। इस बीच लगातार बढ़ रहे जनाक्रोश को देखते हुये बीजेपी के नेता अब मौन हो गए हैं। कल तक आरक्षण खत्म करने की मांग करने वालों को खुली चुनौती देने वाले नेता अब मीडिया के सामने नहीं आ रहे हैं।
कांग्रेस के नेता भी दूर से तमाशा देख रहे हैं। 'मेरे रहते कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता' का भाषण देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अब लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उनके गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि संवैधानिक रूप से सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। बीजेपी के ज्यादातर नेताओं ने अपने इलाकों में जाने के कार्यक्रम रद्द कर दिये हैं। ग्वालियर में बुधवार को सवर्ण प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे को ज्ञापन देने की कोशिश की, लेकिन वह आंदोलनकारियों से मिले नहीं। नाराज लोगों ने ग्वालियर के महापौर को चूड़ियां भेंट कर दीं। सवर्ण आंदोलनकारियों ने सुषमा स्वराज के क्षेत्र विदिशा में सभा की। अन्य जिलों से भी ऐसी ही खबरें आई हैं।सरकार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस आंदोलन का कोई नेता नही है।करणी सेना जैसे संगठन भी इसमें शामिल हो गए हैं। बीजेपी ने अपने सभी नेताओं से कहा है कि वे आंदोलन में शामिल संगठनों के नेताओं से संपर्क करें, लेकिन नेता हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 

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