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26 Sep 2018

एसटी ऐक्ट के खिलाफ हजारों ह्मणों ने हथियार लेकर किया प्रदर्शन : मध्य प्रदेश


उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में एससी-एसटी ऐक्ट के खिलाफ ब्राह्मण समाज के लोगों के एक सम्मेलन ने अब राज्य की शिवराज सरकार की नींद उड़ा दी है। उज्जैन के दशहरा मैदान में शुक्रवार को आयोजित इस विशाल ब्राह्मण सम्मेलन में सवर्ण जाति के लोगों ने एससी-एसटी ऐक्ट पर केंद्र सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए इसकी पुरजोर खिलाफत करने का ऐलान किया है। वहीं हाथ में राइफल, एयरगन और कुल्हाड़ी लिए ब्राह्मण समाज के हजारों लोगों ने घोषणा की है कि अगर सरकार ने सवर्ण जातियों की खिलाफत करने की नीति नहीं छोड़ी तो उसे इसका खामियाजा चुनाव के वक्त उठाना होगा।दूसरी ओर ब्राह्मणों के इस सम्मेलन के बाद मध्य प्रदेश सरकार और बीजेपी सकते में हैं। 15 सितंबर को राज्य में करणी सेना के विशाल प्रदर्शनों के बाद अब ब्राह्मणों का यह सम्मेलन सरकार के लिए चिंता का सबब बन गया है। शुक्रवार को उज्जैन में हुए सम्मेलन के दौरान 'जब-जब ब्राह्मण बोला है, सिहांसन डोला है' का नारा देते हुए प्रतिनिधियों ने एससी-एसटी ऐक्ट पर सरकार से आर-पार की लड़ाई करने का ऐलान किया। सम्मेलन के दौरान हाथ में हथियार लेकर मीडिया से बात करते हुए कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि सवर्ण जाति के लोगों ने सरकार के अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की है और इसका असर अगले चुनाव में देखने को भी मिल जाएगा। 
बड़ी बात यह कि इस ब्राह्मण महासम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी हथियार लेकर सरकार की खिलाफत करती दिखीं। उज्जैन में अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के दौरान ब्राह्मण समाज के लोगों ने मांग की कि प्रदेश और केंद्र की सरकार एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही लागू कराए। इसके अलावा आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर ही समाज में लागू कराया जाए। सम्मेलन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए स्वामी अतुलानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही हमेशा से सवर्ण जातियों का विरोध किया है और अब केंद्र ने एससी-एसटी ऐक्ट पर कानून लाकर इसकी पुष्टि भी की है। वहीं ब्राह्मण नेता कमल किशोर ने सम्मेलन में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर सरकार ने अपना रुख नहीं बदला तो सवर्ण जातियां इसकी पुरजोर खिलाफत करेंगी और दो महीने के भीतर सरकार को ही सवर्णों के पैरों में झुकना पड़ेगा। बता दें कि शुक्रवार को हुए इस सम्मेलन के पहले 15 सितंबर को करणी सेना ने भी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में एससी-एसटी ऐक्ट के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए थे। इसके अलावा पूर्व में सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी कई सभाओं के दौरान सवर्ण जातियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। 

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