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7 Sep 2018

सरकारी विद्यालयों के कर्मचारी सरकार को लगा रहे चूना : अनूपपुर


अनूपपुर। सरकार चाहे लाख दावे क्यों न करें लेकिन शिक्षा का स्तर कुछ इस तरह गिर चुका है की जिम्मेदार प्राचार्य अपनी जिम्मेदारियों से कोसों दूर देखे जा सकते हैं। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत सेमरा के शासकीय हाई स्कूल सेमरा विकासखंड  जिला अनूपपुर में देखा गया जहां  व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार द्वारा लाखों उपाय किए जा रहे हैं किंतु प्रशासनिक अमला स्वच्छता एवं शिक्षा में पलीता लगाने में जुटा है।  विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था कुछ इस कदर चरमराई है कि विद्यालय चलाने की जिम्मेदारी जिन प्राचार्य को दी गई है वह तो जैसे विद्यालय को अपना घर ही समझ बैठे  हैं।  जब मन करता विद्यालय आते हैं हैं जब मन करता है विद्यालय से चले जाते हैं ।  प्राचार्य और कुछ शिक्षकों की विद्यालय समय पर  नहीं पहुंचने की आदतों से परेशान छात्र-छात्राओं ने दिनांक 7 /9 /2018 को  विद्यालय  परिसर पर ताला जड़ दिया।  जिसकी जानकारी जैसे ही अतिथि शिक्षकों को लगी तो 12:00 बजे दोपहर के करीब स्कूल पहुंच कर बच्चों को डांटते हुए स्कूल का ताला खुलवाया गया।   वही विद्यालय के छात्र छात्राओं से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि यहां पर ताला रोजाना सुबह हम लोगों के द्वारा ही खोला जाता है और साफ सफाई पढ़ने वाले छात्र छात्राओं से करवाई जाती है विद्यालय में सुरक्षा का अभाव है विद्यालय का मेन गेट टूटा हुआ है। वही जब विद्यालय के छात्र छात्राओं से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि हमारे विद्यालय में गणित विषय के शिक्षक ना होने के कारण गणित विषय की पढ़ाई ही नहीं होती है।  जिससे छात्र छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होता दिख रहा है बच्चों के द्वारा यह भी बताया गया कि कुछ शिक्षकों के द्वारा उनके बाल पकड़ कर उनके साथ मारपीट तक की जाती है। 
वहीं बच्चों के द्वारा यह भी बताया गया कि विद्यालय परिसर में प्राचार्य  के द्वारा चाहत डस्टबिन झाड़ू तक की व्यवस्था विद्यालय में नहीं है।  जिसकी व्यवस्था स्कूली छात्र छात्राओं के द्वारा चंदा करके की जाती है वहीं बच्चों के अधिकांश कोर्स अधूरे पड़े हैं। 10 सितंबर से एग्जाम होने हैं इससे उनके भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है।  वहीं बच्चों के द्वारा यह भी बताया गया कि हमें छात्रवृत्ति पिछले वर्ष की अब तक नहीं मिली है।  वही दूर से आने वाले छात्र छात्राओं से दूरी प्रमाण पत्र तो स्कूल प्राचार्य द्वारा ले लिया गया है लेकिन अब तक उन्हें साइकिल की व्यवस्था तक नहीं कराई गई है।  इससे यह साफ पता चलता है कि वहां के प्राचार्य बच्चों के प्रति कितने जिम्मेदार हैं अब देखना यह होगा की ऊपर बैठे अधिकारी इस पर संज्ञान लेते हैं या  इसी तरह बच्चों  के भविष्य के साथ खिलवाड़  होता रहेगा। 

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