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27 Sep 2018

स्टेनोग्राफर से जज ने लिखवाए फैसले, हाई कोर्ट ने सैलरी इन्क्रिमेंट रोका : गुजरात


अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने अहमदाबाद फैमिली कोर्ट के जज एमजे पारिख के सैलरी इन्क्रिमेंट पर दो साल के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने जज को अपने स्टेनाग्राफर द्वारा फैसला लिखने के लिए यह सजा दी है। आरोप है कि जज ने स्टेनोग्राफर के ड्राफ्ट किए इन फैसलों को आंख मूंदकर सुना दिया। इस मामले में जज पारिख ने जांच और सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। चीफ जस्टिस आरएस रेड्डी और जस्टिस वीएम पांचोली की डबल बेंच ने बुधवार को जज की याचिका पर हाई कोर्ट और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। जज पारिख पर 2011-12 में जूनागढ़ कोर्ट में बतौर प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज रहते हुए आरोप लगे थे। हाई कोर्ट को उनके बारे में लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (विजिलेंस) ने मामले की जांच की और उन्हें कुछ आरोपों में दोषी पाया।हालांकि हाई कोर्ट की स्टैंडिंग कमिटी ने पारिख को दोषमुक्त करते हुए उन्हें केवल स्टेनोग्राफर से फैसले ड्राफ्ट करवाने का दोषी पाया। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अकील कुरैशी की स्टैंडिंग कमिटी ने मामले को चैंबर कमिटी के सामने पेश किया। कमिटी ने आरोपी जज के वेतन में दो स्तर पर कटौती करने की सिफारिश की। जांच कमिटी ने अगले दो साल के लिए जज के वेतन में बढ़ोतरी पर रोक या उनके रिटायर होने तक (जो भी पहले लागू हो) सैलरी इन्क्रिमेंट न करने की सिफारिश की।जज पारिख नवंबर 2019 में रिटायर होंगे। अदालत के फैसले के बारे में राज्य सरकार को सूचित कर दिया गया है। अदालत का आदेश 27 जून 2017 से प्रभावी माना जाएगा। 

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