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27 Sep 2018

प्राथमिक चिकित्सा ट्रेनिंग के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर बनाने की चल रही फैक्ट्री : नई दिल्ली


नई दिल्ली। दिल्ली में प्राथमिक चिकित्सा ट्रेनिंग के नाम पर झोलाछाप डॉक्टर बनाने की फैक्ट्री चल रही है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल का साफ कहना है कि इस तरह का कोई कोर्स मान्य नहीं है और यह गैरकानूनी है लेकिन जब हमारे रिपोर्टर ने पड़ताल की तो पता चला कि भले आप आठवीं पास ही क्यों न हों, कुछ लोग दिल्ली के बीचोंबीच ट्रेनिंग देकर कैसे झोलाछाप डॉक्टर तैयार कर रहे हैं। राजधानी में हर सोमवार नकली डॉक्टर तैयार करने की पाठशाला लगती है। डॉक्टर बनने के लिए एजुकेशन या क्वॉलिफिकेशन की खास जरूरत नहीं। आठवीं या दसवीं पास, कोई भी डॉक्टर बन सकता है। दिल्ली में बस 18 महीने की ट्रेनिंग लेकर मॉडर्न मेडिसिन से लेकर आयुर्वेद तक में पारंगत हुआ जा सकता है। यह आम लोगों की जिंदगी से साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है? दिल्ली में बिना किसी डर और भय के इस तरह की ट्रेनिंग आईटीओ जैसी जगह पर चल रही है।प्राथमिक चिकित्सा ट्रेनिंग के नाम पर इस कोर्स को रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर फेडरेशन के नाम पर चलाया जाता है। कोर्स के बाद सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। इसमें लिखा होता है कि आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिसिन, दोनों की प्रैक्टिस की जा सकती है। 1500 रुपये रजिस्ट्रेशन के और हर महीने एक हजार रुपये फीस देकर कोई भी डॉक्टर बन सकता है। 18 महीने के इस कोर्स की फीस बस 19500 रुपये। 
इस बारे में दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर गिरीश त्यागी का कहना है कि न तो ऐसा कोई कोर्स होता है और न ही इस तरह कोई ट्रेनिंग दे सकता है। यह सरासर गलत है और यह गैरकानूनी भी है। यह पूरी तरह से झोलाछाप डॉक्टर तैयार करने की साजिश है। यह गंभीर मामला है। जहां तक आरएमपी की बात है तो इस मामले के एक्सपर्ट डॉक्टर अनिल बंसल ने कहा कि आरएमपी के लिए भी एमबीबीएस जरूरी है, लेकिन यहां लोग इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं। कोर्ट ने भी आरएमपी को गैरकानूनी करार दिया है। आरएमपी के नाम से कोई फेडरेशन बना ले, तो इसका मतलब यह नहीं है कि यह मान्य हो गया। यह किसी भी सूरत में कानूनी रूप से मान्य नहीं है। 

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