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13 Sep 2018

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने लोक निर्माण विभाग से मरम्मत का मांगा ब्यौरा : माझेरहाट पुल हादसा


कोलकाता। कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग से पिछले दस साल में माझेरहाट पुल की मरम्मत का ब्यौरा मांगा है। सूत्रों के मुताबिक विभाग से दस्तावेज जल्द से जल्द देने के लिए कहा गया है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया है कि विभाग से दस साल में की गई मरम्मत, पुल से जुड़े नक्शे और यह जानकारी मांगी गई है कि क्या पुल की स्थिति के बारे में चेतावनी जारी की गई थी या नहीं। राज्य की फरेंसिक टीम ने एसआईटी को दी रिपोर्ट में कई साल से मरम्मत न किए जाने को हादसे का कारण बताया है। जांचकर्ताओं को पता चला कि पुल की बीम में लगे स्टील टीएमटी के सरिया में पानी के रिसाव से ज़ंग लग गई थी। इससे उनके वजन उठाने की ताकत कम हो गई थी और पुल का 35 मीटर का हिस्सा नीचे आ गिरा। एसआईटी ने बताया है कि 80 लोगों के बयान लिए जा चुके हैं। एक अधिकारी ने बताया है कि पीडब्ल्यूडी और आरवीएनएल से जवाब आने के बाद एक्सपर्ट्स से तकनीकी राय ली जाएगी। 
एक वरिष्ठ आरवीएनएल अधिकारी ने बताया कि एसआईटी को दी जाने वाली उनकी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि साल 2013 में तीन पिलर्स पर काम किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कह जाएगा कि आंतरिक जांच में आरसीसी की बीम के पुराने और लंबे होने की बात पता चली थी। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने आरवीएनएल से उस जगह मेट्रो स्टेशन के मैप और प्लान के बारे में जानकारी मांगी गई है। साथ ही वहां लगाई गई बल्लियों के बारे में इससे जुड़े इंजिनियर्स के बारे में भी बताने के लिए कहा गया है। आरवीएनएल ने दावा किया है कि साल 2013 में पुल के पास काम किया गया था।अधिकारियों का कहना है कि उस काम से होने वाले वाइब्रेशन का असर 6 घंटे के अंदर तक दिख जाता है, पांच साल के बाद नहीं। रेलवे अधिकारी भी 100 से अधिक बैठकों का ब्यौरा पेश कर दावा करेंगे पीडब्ल्यूडी, केएमसी और आरवीएनएल ने कभी वाइब्रेशन से पुल को खतरा नहीं बताया। 

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